कोलंबो, छह अगस्त (भाषा) श्रीलंका में संवैधानिक सुधार की प्रक्रिया शुरू होने पर भारतीय मूल के तमिल ‘गैर-क्षेत्रीय तमिल समुदाय परिषद’ (एनटीटीसी) के गठन की मांग करेंगे। तमिल प्रोग्रेसिव अलायंस (टीपीए) के नेता मानो गणेशन ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।
बुधवार को गणेशन ने श्रीलंकाई तमिल और भारतीय मूल के तमिल (आईओटी) समुदाय के नए बने समूह के अन्य नेताओं के साथ भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एनटीटीसी के लिए तय की गई भूमिका के बारे में बात की।
गणेशन ने जोर देकर कहा कि संवैधानिक सुधार में न सिर्फ अधिकारों के बंटवारे को सुरक्षित किया जाना चाहिए, बल्कि संविधान में एनटीटीसी को शामिल करके भारतीय मूल के तमिल समुदाय की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को भी मान्यता दी जानी चाहिए।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मिसरी ने श्रीलंकाई नेतृत्व से अपील की कि वे जल्द से जल्द प्रांतीय परिषद चुनाव कराने के अपने वादे को पूरा करें और तमिल लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए श्रीलंका के संवैधानिक प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करें।
गणेशन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यह चिंता वाजिब है कि नया संविधान 13वें संशोधन से मिली उपलब्धियों, खासकर प्रांतीय परिषदों के मामले में, उन्हें कमजोर कर सकता है। 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते की ऐतिहासिक भूमिका को देखते हुए, भारत के पास ऐसी किसी भी संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ आगाह करने का नैतिक अधिकार है, जो अधिकारों के बंटवारे को कमजोर करती हो।’’
भाषा शफीक नरेश
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