गुरुग्राम, छह अगस्त (भाषा) राष्ट्रमंडल खेल के स्वर्ण पदक विजेता भारतीय पैरा एथलीट सोमन राणा ने बृहस्पतिवार को कहा कि पैरा खिलाड़ियों को पैरालंपिक और पैरा एशियाई खेलों जैसे बड़े स्तर पर अपना प्रदर्शन बनाए रखने और बेहतर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मिलने वाली पुरस्कार राशि के साथ अधिक कॉरपोरेट सहयोग और स्थायी सरकारी नौकरियों की भी जरुरत है।
राष्ट्रमंडल खेलों में पैरा खिलाड़ियों की पुरुषों की शॉटपुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले राणा ने कहा कि आर्थिक सुरक्षा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग पर पूरा ध्यान केंद्रित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राणा ने कहा, ‘‘अपने करियर के शुरुआती दिनों में मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा था क्योंकि उस समय न तो मेरे पास नौकरी थी और न ही कोई प्रायोजक। पैरालंपिक और पैरा एशियाई खेलों की तैयारी के लिए काफी धन राशि की आवश्यकता होती है। सहयोग और प्रायोजन के बिना यह बेहद कठिन है। मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि खिलाड़ियों को हर तरह के समर्थन की जरूरत होती है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि करियर के बीच और बाद के चरण में मुझे मजबूत सहयोग मिला। ओजीक्यू (ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट) और टॉप्स योजना के समर्थन के बिना इस स्तर तक पहुंचना और पदक जीतना बहुत मुश्किल होता। ’’
राणा ने ये बातें भारतीय पैरालंपिक समिति की प्रमुख प्रायोजक ‘एम3एम फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान पीटीआई से कही।
हर पैरा खिलाड़ी को मिलने वाले जरूरी सहयोग का जिक्र करते हुए राणा ने कहा, ‘‘हमें उपकरण, खेल किट और अन्य जरूरी सामान तो मिलता है, लेकिन आर्थिक सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, एक स्थायी सरकारी नौकरी खिलाड़ियों को भविष्य की सुरक्षा प्रदान करती है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘समर्थन केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं होना चाहिए। अब कई फाउंडेशन खिलाड़ियों की मदद कर रहे हैं और कई राज्य ‘पदक जीतो, नौकरी पाओ’ जैसी नीतियां लागू कर रहे हैं। खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि के साथ-साथ सरकारी नौकरी भी मिलनी चाहिए। ’’
राणा की बातों से सहमति जताते हुए भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) के अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने कहा कि पैरा खिलाड़ियों को मिल रही बढ़ती पहचान और सहयोग ने भारत में पैरालंपिक आंदोलन को नई दिशा दी है।
झाझरिया ने कहा, ‘‘आज पैरालंपिक आंदोलन देश के हर कोने तक पहुंच चुका है और पूरी दुनिया ने इसे देखा है। राष्ट्रमंडल खेलों में हमारे पैरा खिलाड़ियों का प्रदर्शन असाधारण रहा। यह केवल पदकों की बारिश नहीं थी, बल्कि पदकों का तूफान था। ’’
भाषा नमिता सुधीर
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