मुंबई, छह अगस्त (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को टाटा संस को उच्च श्रेणी की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की सूची में बरकरार रखा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि होल्डिंग कंपनी को सूची में शामिल किए जाने से उसके एनबीएफसी पंजीकरण को लौटाने के लंबित आवेदन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
आरबीआई ने आकार आधारित विनियमन रूपरेखा के तहत उच्च श्रेणी की एनबीएफसी की नवीनतम सूची जारी की। इसमें 17 कंपनियां शामिल हैं। इस व्यवस्था के तहत प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर-बैंकिंग ऋणदाताओं और मुख्य निवेश कंपनियों (सीआईसी) पर अधिक कड़े नियामकीय प्रावधान लागू होते हैं।
आरबीआई ने कहा, ‘‘सूची में टाटा संस प्राइवेट लि. को शामिल किया जाना उसके पंजीकरण रद्द करने के आवेदन के परिणाम को प्रभावित नहीं करेगा। फिलहाल इस आवेदन की जांच की जा रही है।’’
चार सौर अरब डॉलर के टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को पहली बार 2022 में उच्च श्रेणी की एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इस वर्गीकरण के तहत कंपनी को कड़े नियामकीय नियमों का पालन करना पड़ता है। इसमें भविष्य में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना तथा सख्त संचालन व्यवस्था, पूंजी और खुलासा आवश्यकताओं को पूरा करना शामिल है। यह व्यवस्था तबतक रहती है जब तक कि वह अपनी संरचना में बदलाव नहीं करती।
इसके बाद टाटा संस ने वित्तीय कारोबार में अपनी हिस्सेदारी कम करने और समूह के कुछ हिस्सों के पुनर्गठन के लिए कदम उठाए। कंपनी ने आरबीआई के वर्गीकरण से छूट देने का अनुरोध भी किया था।
कंपनी ने उधारी कम करने और अपने वित्तीय सेवा कारोबार के पुनर्गठन के लिए भी कदम उठाए हैं, जिसमें वित्तीय परिचालन को अपनी मुख्य निवेश गतिविधियों से अलग करना शामिल है।
पारंपरिक एनबीएफसी से अलग, टाटा संस एक प्रमुख निवेशक कंपनी के रूप में काम करती है। इसका मुख्य कारोबार टाटा समूह की कंपनियों में निवेश रखना है, न कि ऋण देना। कंपनी की टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स, टाइटन और इंडियन होटल्स कंपनी जैसी सूचीबद्ध कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है। इसकी आय का एक बड़ा हिस्सा इन कंपनियों से मिलने वाले लाभांश से आता है।
आरबीआई की उच्च श्रेणी में वे एनबीएफसी और मुख्य निवेश कंपनियां शामिल होती हैं, जिन्हें अपने आकार, जटिलता और वित्तीय प्रणाली से जुड़ाव के कारण प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इन संस्थाओं पर अन्य एनबीएफसी की तुलना में अधिक कड़े संचालन, पूंजी और खुलासा नियम लागू होते हैं।
आरबीआई ने टाटा संस के एनबीएफसी पंजीकरण लौटाने के आवेदन पर फैसला लेने की कोई समयसीमा नहीं बताई है।
टाटा संस के अलावा सूची में अन्य कंपनियों में बुनियादी ढांचा निवेशक कंपनियां आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन और हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हुडको) शामिल हैं। जमा स्वीकार करने वाली एनबीएफसी में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस तथा आवास वित्त कंपनी एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस सूची में शामिल हैं।
जमा स्वीकार नहीं करने वाली एनबीएफसी में टाटा कैपिटल और चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस के अलावा मुथूट फाइनेंस, आदित्य बिड़ला कैपिटल, एलएंडटी फाइनेंस, बजाज हाउसिंग फाइनेंस, एचबीडी फाइनेंशियल सर्विसेज लि. और पीरामल फाइनेंस शामिल हैं।
आरबीआई ने एनबीएफसी को उनके आकार, गतिविधियों और वित्तीय प्रणाली के लिए संभावित जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा है। आधार श्रेणी (एनबीएफसी-बीएल) में छोटे एनबीएफसी आते हैं, जिनका संचालन अपेक्षाकृत सरल होता है। मध्यम श्रेणी (एनबीएफसी-एमएल) में निवेश और ऋण कंपनियां, आवास वित्त कंपनियां, बुनियादी ढांचा वित्त कंपनियां और छोटे कर्ज देने वाले संस्थान जैसी इकाइयां शामिल होते हैं।
उच्च श्रेणी (एनबीएफसी-यूएल) में प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण एनबीएफसी शामिल होती हैं, जिन पर बैंकों की तरह कई मामलों में कड़े नियामकीय नियम लागू होते हैं। शीर्ष श्रेणी (एनबीएफसी-टीएल) उन एनबीएफसी के लिए आरक्षित है, जिन्हें आरबीआई प्रणाली के लिहाज से अधिक जोखिम वाला मानता है और जिनके लिए और भी कड़े नियमों की जरूरत हो सकती है।
आरबीआई उच्च श्रेणी एनबीएफसी का चयन परिसंपत्ति आकार, कारोबार की जटिलता, वित्तीय प्रणाली से जुड़ाव, निवेश, सार्वजनिक जमा और प्रणाली में महत्व जैसे कारकों के आधार पर करता है।
इन कंपनियों को पूंजी पर्याप्तता, संचालन, खुलासा और जोखिम प्रबंधन से जुड़े कड़े नियमों का पालन करना होता है।
भाषा रमण अजय
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