केवल पूंजी या नीति से भारत 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता: सीजेआई सूर्यकांत

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केवल पूंजी या नीति से भारत 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता: सीजेआई सूर्यकांत

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  • Publish Date - April 11, 2026 / 03:54 PM IST,
    Updated On - April 11, 2026 / 03:54 PM IST

नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि देश केवल पूंजी या नीति के जरिये से 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता है, बल्कि इसमें कानूनी प्रणाली की गुणवत्ता एक महत्वपूर्ण कारक होगी।

उन्होंने विकसित होती अर्थव्यवस्था की मांगों को पूरा करने के लिए कानूनी ढांचे में आमूलचूल बदलाव का आह्वान करते हुए यह बात कही।

सीजेआई ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वाणिज्यिक कानून में पूर्वानुमान, विशेषज्ञता और सद्भावना की संस्कृति की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए ऐसी पूंजी की आवश्यकता होगी, जिसमें दीर्घकालिक प्रतिबद्धताएं शामिल हों और जिसके लिए निवेशक का विश्वास अनिवार्य है।

बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यक्रम ‘रूल ऑफ लॉ कन्वेंशन 2026’ में ‘भारत के 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए कानूनी सुधार का मसौदा’ विषय पर बोलते हुए सीजेआई ने कहा कि यह विषय केवल एक आकांक्षा नहीं, बल्कि एक गंभीर विचार है।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ”मुझे भरोसा है कि हम निश्चित रूप से इस अवसर पर खरे उतरेंगे। 10,000 अरब डॉलर का पड़ाव केवल पूंजी या नीति से नहीं बनेगा। यह काफी हद तक उस कानूनी प्रणाली की गुणवत्ता से बनेगा जो कानून के शासन और उन वादों की रक्षा करती है जिन पर यह सब टिका है।”

उन्होंने कहा कि जो पीढ़ी 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए भारत के वाणिज्यिक न्यायशास्त्र को आकार देगी, उसे उसी तरह याद किया जाएगा जैसे संविधान को आकार देने वाली पीढ़ी को याद किया जाता है।

सीजेआई ने कहा कि निवेशकों को यह जानने की जरूरत है कि क्या निवेश को नियंत्रित करने वाली कानूनी प्रणाली ईमानदार, सुसंगत और पूर्वानुमानित बनी रहेगी।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय