केंद्र की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में बाजार से 8.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना

Ads

केंद्र की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में बाजार से 8.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना

  •  
  • Publish Date - March 27, 2026 / 10:26 PM IST,
    Updated On - March 27, 2026 / 10:26 PM IST

नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) केंद्र सरकार राजस्व अंतर को पूरा करने के लिए 2026-27 के अप्रैल-सितंबर अवधि के दौरान दिनांकित प्रतिभूतियों के जरिये बाजार से आठ लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

मंत्रालय ने कहा कि 2026-27 के बजट अनुमान में सकल बाजार उधारी 17.20 लाख करोड़ रुपये थी। बजट पेश होने के बाद से परिपक्व हो चुकी कुछ सरकारी प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद से सकल बाजार उधारी घटकर 16.09 लाख करोड़ रुपये रह गई।

उसने कहा, ‘‘ 16.09 लाख करोड़ रुपये में से 8.20 लाख करोड़ रुपये (51 प्रतिशत) पहली छमाही में दिनांकित प्रतिभूतियों के जरिये उधार लेने की योजना है। इसमें 15,000 करोड़ रुपये के सरकारी हरित बॉन्ड (एसजीआरबी) भी शामिल हैं।’’

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत के बराबर अनुमानित राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का प्रस्ताव रखा था।

कुल राशि के रूप में 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 16.9 लाख करोड़ रुपये आंका गया है।

उन्होंने बजट पेश करते समय कहा था, ‘‘ राजकोषीय घाटे को वित्तपोषित करने के लिए दिनांकित प्रतिभूतियों से शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। शेष वित्तपोषण लघु बचत एवं अन्य स्रोतों से आने की उम्मीद है। सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।’’

बयान के अनुसार 8.2 लाख करोड़ रुपये की सकल बाजार उधारी 26 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से पूरी की जाएगी। बाजार से उधारी 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 वर्ष की प्रतिभूतियों में की जाएगी।

विभिन्न परिपक्वता अवधियों के तहत उधारी (एसजीआरबी सहित) का हिस्सा तीन वर्ष (8.1 प्रतिशत), पांच वर्ष (15.4 प्रतिशत), सात वर्ष (8.1 प्रतिशत), 10 वर्ष (29 प्रतिशत), 15 वर्ष (14.5 प्रतिशत), 30 वर्ष (7.3 प्रतिशत), 40 वर्ष (8 प्रतिशत) और 50 वर्ष (9.6 प्रतिशत) होगा।

संस्थागत एवं खुदरा निवेशकों को अपने निवेश की योजना प्रभावी ढंग से बनाने में सक्षम बनाने तथा सरकारी प्रतिभूति बाजार में पारदर्शिता एवं स्थिरता प्रदान करने के लिए सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के परामर्श से इस अवधि के दौरान प्रति सप्ताह 28,000 करोड़ रुपये से 34,000 करोड़ रुपये तक उधार लेने की योजना बनाई है।

इस कैलेंडर के अंतर्गत आने वाली सभी नीलामियों में गैर-प्रतिस्पर्धी बोली की सुविधा होगी जिसके तहत अधिसूचित राशि का पांच प्रतिशत निर्दिष्ट खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित रहेगा।

सरकार ने कहा कि जैसा कि पहले भी होता रहा है, वह आरबीआई के परामर्श से अधिसूचित राशि, निर्गम अवधि, परिपक्वता आदि के संदर्भ में इस कैलेंडर में आवश्यकतानुसार संशोधन करने तथा बाजार को पूर्व सूचना देकर गैर-मानक परिपक्वता वाले साधन, ‘फ्लोटिंग रेट बॉन्ड’ (एफआरबी) तथा मुद्रास्फीति-सूचकांकित बॉन्ड (आईआईबी) सहित विभिन्न प्रकार के साधन जारी करने की मजबूती बनाए रखेगी। यह निर्णय आवश्यकताओं, बदलती बाजार परिस्थितियों और अन्य प्रासंगिक कारकों के आधार पर लिया जाएगा।

केंद्र सरकार नीलामी अधिसूचनाओं में दर्शाई गई प्रत्येक प्रतिभूति के लिए 2,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त अभिदान बनाए रखने के लिए ‘ग्रीनशू’ यानी अधिक बोली आने पर उसे रखने विकल्प का उपयोग करने का अधिकार भी सुरक्षित रखेगी।

भाषा निहारिका रमण

रमण