Excise Duty on Petrol and Diesel / Image: IBC24 Customized
मिडिल ईस्ट में इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का सीधा असर अब आपकी जेब पर नहीं पड़ेगा। (Excise Duty on Petrol and Diesel) अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 70 डॉलर से उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जिससे तेल कंपनियों को प्रति लीटर 30 रुपये तक का घाटा हो रहा था, लेकिन जनता को इस बोझ से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले को ‘उपभोक्ताओं को बड़ी राहत’ करार दिया है। उन्होंने साफ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता है कि, वैश्विक संकट का बोझ आम आदमी के किचन और गाड़ी पर न पड़े।
Excise Duty on Petrol and Diesel: वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी देश को भरोसा दिलाया है कि, कीमतें बढ़ीं, सप्लाई प्रभावित: पश्चिम एशिया के संघर्ष से क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए, सप्लाई चेन पर असर पड़। भारत के पास पर्याप्त स्टॉक: देश में अगले 2 महीनों के लिए कच्चा तेल उपलब्ध है, LPG, LNG और PNG की सप्लाई भी फिलहाल सुरक्षित है। (Excise Duty on Petrol and Diesel) आयात पर ज्यादा निर्भरता: भारत लगभग 90% LPG आयात करता है, जो ज्यादातर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है।
घरेलू जरूरत को प्राथमिकता: सरकार ने पहले कमर्शियल सप्लाई घटाई, फिर धीरे-धीरे बढ़ाकर अब 70% तक कर दी। 14 मार्च से अब तक 30,000 टन LPG सप्लाई की गई।
अफवाहों से पंपों पर भीड़: कुछ जगहों पर लंबी कतारें दिखीं, लेकिन सरकार ने साफ किया है (Excise Duty on Petrol and Diesel) कि देश में पेट्रोल-डीजल या गैस की कोई कमी नहीं है। इधर विपक्ष का कहना है कि, केंद्र सरकार ने ऑयल कंपनियों के फायदे के लिए ये कदम उठाया है।
Excise Duty on Petrol and Diesel: सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल पंपों पर लग रही कतारें महज अफवाहों का नतीजा हैं। तेल या गैस की कोई कमी नहीं है। सरकार के इस कदम से न केवल ट्रांसपोर्टेशन सस्ता बना रहेगा, बल्कि महंगाई को काबू में रखने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
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