केंद्र ने उत्तर प्रदेश से सहरपुर जमरपानी कोयला खदान विकसित करने का किया आग्रह

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केंद्र ने उत्तर प्रदेश से सहरपुर जमरपानी कोयला खदान विकसित करने का किया आग्रह

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  • Publish Date - September 17, 2026 / 10:25 PM IST,
    Updated On - September 17, 2026 / 10:25 PM IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को सहरपुर जमरपानी कोयला खदान को विकसित करने के लिए कदम उठाने की सलाह दी है, ताकि राज्य के बिजली संयंत्रों के लिए दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम हो।

कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि झारखंड के दुमका जिले में स्थित इस कोयला खदान में 97.3 करोड़ टन से अधिक का भंडार है। इसे 13 अगस्त, 2015 को उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (यूपीआरवीयूएनएल) को उसके ताप बिजली संयंत्रों की कोयला जरूरतों को पूरा करने के लिए आवंटित किया गया था।

मंत्रालय ने बताया कि यह खदान कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत आवंटित की गई थी।

मंत्रालय के अनुसार, आवंटन के 10 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यूपीआरवीयूएनएल की ओर से आवश्यक पहल नहीं किए जाने के कारण खदान को चालू करने की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है। इसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश के बिजली संयंत्रों की पूरी कोयला जरूरत अब भी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) से पूरी की जा रही है।

कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड उत्तर प्रदेश समेत देशभर को कोयला आपूर्ति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश को सलाह दी है कि वह अपने ताप बिजली संयंत्रों के लिए दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाहरी कोयला स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए सहरपुर जमरपानी की अपने निजी कोयला खदान के जल्द विकास को प्राथमिकता दे।

मंत्रालय ने मीडिया में आई उन खबरों को खारिज किया, जिनमें उत्तर प्रदेश में कोयला आपूर्ति बाधित होने के कारण गंभीर बिजली संकट की बात कही गई थी। मंत्रालय ने कहा कि 15 सितंबर, 2026 तक यूपीआरवीयूएनएल का कोई भी ताप बिजली संयंत्र ‘गंभीर भंडार’ श्रेणी में नहीं था।

मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा कोयला भंडार की स्थिति से संयंत्र स्तर पर कोयले की गंभीर कमी का संकेत नहीं मिलता है।

भाषा यासिर रमण

रमण