मुंबई, 21 अगस्त (भाषा) भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अतुल कुमार गोयल ने शुक्रवार को कहा कि बढ़ते साइबर खतरों, डिजिटल धोखाधड़ी, डेटा सुरक्षा और प्रौद्योगिकी से जुड़े जोखिमों के बीच देश की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच सहयोग जरूरी है।
चार्टर्ड एकाउंटटें की शीर्ष निकास भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के ‘आईसीएआई-भारत डीआईजीआईटी 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत की बढ़ती डिजिटल वित्तीय व्यवस्था की चुनौतियों से कोई एक संस्था अकेले नहीं निपट सकती।
उन्होंने कहा कि नियामक, बैंक, वित्त प्रौद्योगिकी कंपनियां, प्रौद्योगिकी कंपनियां, लेखा परीक्षक, फोरेंसिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच सहयोग की जरूरत है।
गोयल ने कहा, ‘‘धोखाधड़ी की रोकथाम, फोरेंसिक जांच, साइबर सुरक्षा, डेटा प्रशासन, कृत्रिम मेधा (एआई) और प्रौद्योगिकी आधारित जांच एवं आश्वासन के क्षेत्रों में यह सहयोग जरूरी है।’’
आईसीएआई द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘आईसीएआई-भारत डीआईजीआईटी 2026’ का उद्देश्य डिजिटल संचालन और भरोसे को मजबूत करना, साइबर सुरक्षा क्षमता बढ़ाना, प्रौद्योगिकी आधारित जांच एवं आश्वासन को बढ़ावा देना, धोखाधड़ी के जोखिम का बेहतर प्रबंधन करना, डिजिटल जांच के क्षेत्र में क्षमता विकसित करना तथा नियामकों, सरकार और वित्तीय संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहकों का भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है और किसी भी कीमत पर इसे टूटने नहीं देना चाहिए।
गोयल ने कहा, ‘‘यदि ग्राहक का भरोसा टूटता है तो उद्योग के सामने भी चुनौती खड़ी होती है। हम धोखाधड़ी की रोकथाम, फोरेंसिक जांच, साइबर सुरक्षा, डेटा प्रशासन, एआई और प्रौद्योगिकी आधारित जांच एवं आश्वासन के क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।’’
भाषा योगेश रमण
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