भारतीय बौद्धिक संपदा वाले मोबाइल फोन 10-14 महीने में बाजार में आने की उम्मीदः वैष्णव

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भारतीय बौद्धिक संपदा वाले मोबाइल फोन 10-14 महीने में बाजार में आने की उम्मीदः वैष्णव

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 08:35 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 08:35 PM IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकार वाले और देश में डिजाइन किए गए मोबाइल फोन अगले 10-14 महीने के भीतर बाजार में आने की उम्मीद है। ये फोन 62,500 करोड़ रुपये की ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ (एमपीएमएस) के तहत पेश किए जाएंगे।

वैष्णव ने एमपीएमएस की अधिसूचना जारी किए जाने के मौके पर कहा कि इस योजना के तहत आवेदन करने वाली कंपनियों को यह साबित करना होगा कि मोबाइल फोन के विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले डिजाइन के बौद्धिक संपदा अधिकार उनके पास हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय ब्रांड विकसित करने के लिए लक्षित क्षेत्र में हम इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट हैं कि डिजाइन आपका अपना होना चाहिए। यह किसी अन्य उत्पाद की नकल नहीं हो सकता। उन्हें अपना डिजाइन तैयार करना होगा और साबित करना होगा कि उसका बौद्धिक संपदा अधिकार उनका अपना है।’’

वैष्णव ने कहा कि सरकार भारतीय ब्रांडों के डिजाइन के मूल्यांकन में किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगी। उन्होंने कहा कि तीन कंपनियों को डिजाइन के विकल्प पेश करने को कहा गया है और उनके डिजाइन अपने क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ उत्पादों के स्तर के होने चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें तीन ऐसी कंपनियां दिख रही हैं, जिनमें अब से करीब 10-14 महीने में इस क्षेत्र में आने की क्षमता है।’’

फिलहाल कोई भी मोबाइल फोन पूरी तरह भारत में डिजाइन नहीं किया जाता है। घरेलू ब्रांड लावा इंटरनेशनल और एआई प्लस का दावा है कि वे अपने स्मार्टफोन को स्थानीय स्तर पर ही डिजाइन करते हैं।

एमपीएमएस को दो हिस्सों में बांटा गया है। इनमें मोबाइल फोन विनिर्माण को बढ़ावा देने वाला लक्षित खंड-1 (टीएस1) और भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को समर्थन देने वाला लक्षित खंड-2 (टीएस2) शामिल हैं।

टीएस1 के तहत अनुबंध पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनियों समेत पिछले वित्त वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली मोबाइल फोन कंपनियां योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होंगी।

टीएस2 के तहत आवेदन करने वाली कंपनियों में 51 प्रतिशत भारतीय स्वामित्व और वित्त वर्ष 2025-26 में कम-से-कम 1,000 करोड़ रुपये का कारोबार होना जरूरी है।

वैष्णव ने कहा कि भारत में पहले मोबाइल फोन विनिर्माण का परिवेश था, लेकिन कर-संबंधी मुद्दों और चीनी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में टिक पाना मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि अब विनिर्माण का परिवेश फिर से स्थापित हो गया है और भारतीय ब्रांड विकसित करने पर ध्यान देने का समय है।

एमपीएमएस को मार्च 2026 में मोबाइल फोन उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की अवधि समाप्त होने के बाद पेश किया गया है। यह चालू वित्त वर्ष से शुरू होकर पांच साल तक लागू रहेगी।

दिशानिर्देशों के अनुसार, मौजूदा ब्रांड को योजना का लाभ लेने के लिए हर साल वित्त वर्ष 2025-26 के कुल कारोबार से कम से कम 5,000 करोड़ रुपये अधिक की बिक्री का न्यूनतम स्तर हासिल करना होगा। नए ब्रांड के लिए योजना के तहत पात्र होने के लिए भारत में सालाना कम-से-कम 10,000 करोड़ रुपये की बिक्री जरूरी होगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि भारतीय ब्रांडों को वैश्विक बनाने के लिए सरकार तकनीकी संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता पर ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य अधिक आर्थिक मूल्य हासिल करना, अपने उत्पाद और बौद्धिक संपदा विकसित करना तथा भारत को उत्पाद बनाने वाला देश बनाना है।

योजना को एक परियोजना प्रबंधन एजेंसी के माध्यम से लागू किया जाएगा। मंत्रालय इसके क्रियान्वयन से जुड़े दिशानिर्देश अलग से जारी करेगा।

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम