वाणिज्यिक एलपीजी की कीमत 42 रुपये बढ़ी, छोटा सिलेंडर 11 रुपये महंगा

वाणिज्यिक एलपीजी की कीमत 42 रुपये बढ़ी, छोटा सिलेंडर 11 रुपये महंगा

वाणिज्यिक एलपीजी की कीमत 42 रुपये बढ़ी, छोटा सिलेंडर 11 रुपये महंगा
Modified Date: June 1, 2026 / 08:09 pm IST
Published Date: June 1, 2026 8:09 pm IST

(फाइल तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) होटल, रेस्तरां एवं ढाबों में इस्तेमाल होने वाले वाणिज्यिक एलपीजी के अलावा पांच किलो वाले छोटे सिलेंडर के दाम सोमवार को बढ़ा दिए गए, जबकि घरेलू रसोई गैस के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया।

उद्योग सूत्रों के मुताबिक, 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत 42 रुपये बढ़कर दिल्ली में 3,113.50 रुपये हो गई, जबकि पहले इसकी कीमत 3,071.50 रुपये थी।

इससे पहले एक मई को वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के दाम में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई थी।

वहीं, पांच किलोग्राम वाले छोटे गैस सिलेंडर की कीमत भी 11 रुपये बढ़कर 821.50 रुपये हो गई है।

हालांकि, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए 14.2 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर स्थिर रखी गई है। इसमें आखिरी बार मार्च की शुरुआत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।

पेट्रोलियम विपणन कंपनियां हर महीने कीमतों की समीक्षा करती हैं और विभिन्न राज्यों में मूल्य-वर्धित कर (वैट) जैसे स्थानीय करों के कारण दरें अलग-अलग हो सकती हैं।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू एलपीजी के दाम स्थिर रखे गए हैं ताकि उपभोक्ताओं पर बोझ न पड़े। हाल के महीनों में 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की आपूर्ति लागत में करीब 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।

‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है, जिससे उन्हें सिलेंडर करीब 613 रुपये में मिलता है जबकि इसकी आपूर्ति लागत करीब 1,200 रुपये है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोपेन की कीमत अप्रैल में 38 प्रतिशत बढ़ गई। इसके बावजूद भारत में घरेलू गैस की कीमतें क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में निचले स्तर पर बनी हुई हैं।

हालांकि, इस राहत की कीमत सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों को उठानी पड़ी है। वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू एलपीजी पर सरकारी तेल कंपनियों को 41,338 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था जो 2025-26 में बढ़कर करीब 60,000 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है।

सरकार ने इसका कुछ बोझ कम करने के लिए चालू वित्त वर्ष में सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों के लिए 30,000 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


लेखक के बारे में