फसलों विविधीकरण, बागवानी उत्पादकता बढ़ाना किसानों की समृद्धि की कुंजी: सैनी

फसलों विविधीकरण, बागवानी उत्पादकता बढ़ाना किसानों की समृद्धि की कुंजी: सैनी

फसलों विविधीकरण, बागवानी उत्पादकता बढ़ाना किसानों की समृद्धि की कुंजी: सैनी
Modified Date: May 28, 2026 / 09:12 pm IST
Published Date: May 28, 2026 9:12 pm IST

करनाल, 28 मई (भाषा) हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बृहस्पतिवार को कहा कि फसलों में विविधता लाना और बागवानी-आधारित खेती किसानों की समृद्धि की कुंजी है। उन्होंने राज्य में बागवानी क्षेत्र के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई उपायों का सुझाव भी दिया।

मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय को 14 नए बागवानी विज्ञान केंद्र समर्पित किए और कहा कि अब फसल कटाई बाद के प्रबंधन, पौधों के कीट नियंत्रण और रोगों जैसे विषयों में स्नातोकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने ‘बागवानी फसलों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज और रोपण सामग्री का रणनीतिक प्रतिमान’ विषय पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ये केंद्र किसानों तक नवीनतम तकनीकें, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और वैज्ञानिक मार्गदर्शन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस सम्मेलन का आयोजन महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल और लेफ्टिनेंट अमित मेमोरियल फाउंडेशन द्वारा किया गया था।

इस कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने बागवानी वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को शील्ड, शॉल और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया।

सैनी ने कहा कि भारत दुनिया में फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और देश सालाना 36 करोड़ टन से अधिक बागवानी उपज का उत्पादन करता है।

आज भारत आम, केला, अमरूद और अनार जैसे फलों, और आलू तथा प्याज जैसी सब्जियों के उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है।

हालांकि, सैनी ने कहा कि उच्च उत्पादन के बावजूद, गुणवत्ता, ग्रेडिंग, रोग-मुक्त रोपण सामग्री और फसल कटाई बाद के प्रबंधन में कमियों के कारण देश को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अब दुनिया यह मानती है कि गुणवत्तापूर्ण बीज और रोपण सामग्री कृषि उत्पादकता को 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।

इसलिए, उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है और सुझाव दिया कि बदलते समय की मांग है कि हम नए दृष्टिकोण अपनाएं।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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