कोलकाता, दो अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल में जुलाई की शुरुआत से कच्चे जूट की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। इससे सरकारी जूट पैकेजिंग सामग्री के मूल्य निर्धारण तंत्र को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जबकि उद्योग जगत ने दैनिक बाजार के भाव तय करने के तरीकों पर सवाल उठाए हैं।
जूट बेलर्स एसोसिएशन (जेबीए) के मुताबिक टीडी-5 श्रेणी के कच्चे जूट (दक्षिण बंगाल) की मानक दर नौ जुलाई को 18,300 रुपये प्रति कुंतल थी, जो एक अगस्त तक गिरकर 9,100 रुपये रह गई। यह लगभग तीन हफ्तों में 9,000 रुपये से अधिक की गिरावट है।
जूट उद्योग के दिग्गज और आईजेएमए के पूर्व चेयरमैन संजय कजारिया ने कहा, ”यह एक असाधारण गिरावट है जो किसानों, जूट मिलों और सरकार की पैकेजिंग प्रणाली के सामने गंभीर सवाल खड़े करती है। उद्योग को यह जांचने के लिए सौदों पर आधारित जांच की आवश्यकता है कि कीमतें इस तरह कैसे घटीं, विशेष रूप से बाजार में नई फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने से पहले ही ऐसा क्यों हुआ।”
इंडियन जूट मिल एसोसिएशन (आईजेएमए) ने 14 जुलाई को जेबीए के चेयरमैन मदन गोपाल माहेश्वरी को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि प्रकाशित जेबीए दरें ”बाजार के वास्तविक सौदों को नहीं दर्शाती हैं।”
उन्होंने कहा कि मिलों को प्रकाशित दरों की तुलना में तैयार डिलीवरी अनुबंधों के लिए अधिक कीमत चुकाने को मजबूर होना पड़ रहा है, और फिर भी आपूर्ति अक्सर कम रह जाती है।
भाषा पाण्डेय
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