भौतिक एआई की वैश्विक दौड़ शुरू, भारत के पास अच्छे अवसर: एडवर्ब सीईओ

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भौतिक एआई की वैश्विक दौड़ शुरू, भारत के पास अच्छे अवसर: एडवर्ब सीईओ

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  • Publish Date - August 2, 2026 / 05:43 PM IST,
    Updated On - August 2, 2026 / 05:43 PM IST

(मौमिता बक्शी चटर्जी).

नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन कंपनी एडवर्ब के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संगीत कुमार का मानना ​​है कि आने वाले दो दशकों में जब भौतिक कृत्रिम मेधा उद्योग का स्वरूप बदल रहा होगा, तब भी इंसान और रोबोट साथ-साथ काम करेंगे तथा नियंत्रण मज़बूती से इंसानों के हाथ में ही रहेगा। कंपनी के सह संस्थापक एवं सीईओ कुमार ने कहा कि रोबोटिक्स में तेज़ प्रगति के साथ नियमों को भी तेजी से विकसित होना होगा, लेकिन उन्होंने इस धारणा को खारिज किया कि रोबोट इंसानों पर हावी हो जाएंगे। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में हर स्वचालन प्रक्रिया में मनुष्य की भूमिका बनी रहेगी। एडवर्ब अब रोबोटिक्स के उस अगले चरण पर दांव लगा रही है, जिसे कुमार सहयोगी रोबोट, ‘क्वाड्रुपेड्स’ और मानवाकार रोबोट कहते हैं। कुमार के मुताबिक, “भौतिक एआई” की वैश्विक दौड़ शुरू हो चुकी है और भारत के पास इसमें मजबूत कंपनियां खड़ी करने का बड़ा अवसर है। नौकरी जाने की आशंकाओं पर उन्होंने कहा कि कुछ दोहराव वाले और शारीरिक रूप से कठिन काम जरूर स्वचालित होंगे, लेकिन इससे नए रोजगार भी पैदा होंगे क्योंकि उत्पादकता बढ़ेगी। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे लगातार नए कौशल सीखते रहें। उनके अनुसार, जो लोग हर पांच-छह साल में खुद को नए ज्ञान से अद्यत नहीं करेंगे, वे पीछे रह जाएंगे। एडवर्ब को साल 2016 में संगीत कुमार, प्रतीक जैन, सतीश शुक्ला और बीर सिंह ने स्थापित किया था। कंपनी आज 25 से अधिक देशों में 350 से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं दे रही है। कंपनी की आय का लगभग आधा हिस्सा भारत और आधा विदेशी बाजारों से आता है। कंपनी का अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्र नोएडा स्थित है, जिसे कंपनी “बॉट वैली” कहती है, जबकि इसका प्रमुख विनिर्माण संयंत्र ग्रेटर नोएडा में है। कंपनी का दावा है कि यह एक ही स्थान पर मोबाइल रोबोट बनाने की दुनिया की सबसे बड़ी इकाइयों में से एक है, जहां सालाना एक लाख रोबोट बनाए जा सकते हैं। भाषा यासिर पाण्डेयपाण्डेय