नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीमा शुल्क राजस्व में पांच प्रतिशत की मामूली वृद्धि का अनुमान लगाया है। एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के प्रभाव, पूंजीगत वस्तुओं के आयात पर शुल्क छूट और खाद्य तेल के आयात में कमी को ध्यान में रखते हुए यह लक्ष्य तय किया गया है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने बजट के बाद पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। गौरतलब है कि 22 सितंबर, 2025 से लगभग 375 वस्तुओं पर कर की दरों में कटौती की गई थी।
चतुर्वेदी ने जोर देकर कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के कर राजस्व लक्ष्य वास्तविक और हासिल करने योग्य हैं।
बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीमा शुल्क राजस्व पांच प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.71 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। वहीं, जीएसटी संग्रह 10.19 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो मुआवजा उपकर को छोड़कर सालाना आधार पर 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। बता दें कि मुआवजा उपकर जनवरी में समाप्त हो गया है।
चतुर्वेदी ने कहा कि सीमा शुल्क में मामूली वृद्धि के अनुमान इस धारणा पर आधारित हैं कि आने वाले समय में अधिक एफटीए होंगे। इसका मतलब है कि शुल्क दरों के बजाय तरजीही दरों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे राजस्व में कमी आ सकती है।
इसके अलावा, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बजट में घोषित पूंजीगत वस्तुओं के आयात पर सीमा शुल्क छूट और पीएलआई जैसी योजनाओं से भी संग्रह पर असर पड़ सकता है। साथ ही, खाद्य तेल के आयात में संभावित कमी से भी राजस्व वसूली कम होगी।
सीबीआईसी प्रमुख ने कहा, ‘‘इन्हीं कारणों से हमने वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों के मुकाबले वृद्धि के अनुमानों में बहुत सतर्क और रूढ़िवादी रुख अपनाया है।’’
भाषा पाण्डेय अजय
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