खाद्य नियामक के ‘100 प्रतिशत’ के दावे पर रोक आदेश के खिलाफ कानूनी सलाह ले रही है डाबर

Ads

खाद्य नियामक के ‘100 प्रतिशत’ के दावे पर रोक आदेश के खिलाफ कानूनी सलाह ले रही है डाबर

  •  
  • Publish Date - August 4, 2026 / 08:45 PM IST,
    Updated On - August 4, 2026 / 08:45 PM IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा डाबर इंडिया के ‘100 प्रतिशत’ के दावे वाले उत्पादों की बिक्री रोकने के आदेश के खिलाफ कंपनी कानूनी सलाह ले रही है। एक दिन पहले नियामक ने यह आदेश दिया था।

देश की इस बड़ी एफएमसीजी कंपनी ने कहा कि वह आगे की कार्रवाई के लिए ‘कानूनी सलाह ले रही है। इससे संकेत मिलता है कि रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनी खाद्य नियामक के खिलाफ कानूनी रास्ता अपना सकती है।

डाबर ने कहा कि उसने एफएसएसएआई के आदेश में बताए गए उत्पादों के लेबल, विज्ञापनों और वेबसाइट सामग्री में ‘100 प्रतिशत’ दावे को हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी और ज़्यादातर बदलाव या तो पूरे हो चुके हैं या अभी चल रहे हैं।

कंपनी ने कहा कि वह नियामक को जवाब दे रही है और मामले को सुलझाने के लिए एफएसएसएआई के साथ सकारात्मक रूप से बातचीत जारी रखेगी।

हालांकि, कंपनी ने यह भी कहा, ‘‘डाबर आगे की कार्रवाई के बारे में कानूनी सलाह भी ले रही है।’’

सोमवार को, खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने कहा था कि उसने डाबर इंडिया को शहद, गाय का घी और खाने के तेल जैसे कई उत्पादों को ‘100 प्रतिशत’ दावे के साथ बेचने से रोक दिया है, क्योंकि ऐसी लेबलिंग कानून के खिलाफ है।

सोशल मीडिया पोस्ट में एफएसएसएआई ने बताया कि उसने डाबर इंडिया लिमिटेड को गुमराह करने वाले ‘100 प्रतिशत’ दावे वाले खाद्य उत्पादों – जैसे शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और ऐसी ही अन्य चीज़ें – की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।

इसके उलट, डाबर इंडिया ने एक बयान में कहा कि उसके उत्पादों के लेबल पर दी गई जानकारी मौजूदा कानूनी और नियामकीय नियमों के अनुरूप है।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘डाबर इंडिया का मानना ​​है कि हमारे उत्पादों के लेबल पर दी गई जानकारी मौजूदा कानूनी और नियामकीय नियमों के मुताबिक है और लंबे समय से चली आ रही उद्योग की परंपराओं के अनुरूप है। डाबर अपने उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता पर कायम है और उसने कभी कोई गुमराह करने वाला दावा नहीं किया है।’

नियमों के उल्लंघन के बारे में जानकारी देते हुए, एफएसएसएआई ने कहा था कि ‘कंपनी की वेबसाइट पर बेचे जा रहे खाद्य उत्पादों पर ‘100 प्रतिशत प्राकृतिक’, ‘100 प्रतिशत शुद्ध’, ‘100 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी’, ‘100 प्रतिशत जैविक’ और ‘100 प्रतिशत टेंडर कोकोनट वॉटर’ जैसे गुमराह करने वाले ‘100 प्रतिशत’ वाले दावे पाए गए।’

नियामक ने कहा कि ‘100 प्रतिशत वाले दावों का इस्तेमाल एफएसएस (विज्ञापन और दावे) कानून, 2018 का उल्लंघन है, क्योंकि ये दावे अस्पष्ट और ऐसे हैं जिनकी पुष्टि नहीं की जा सकती और जिनसे ग्राहकों के गुमराह होने की संभावना है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

अजय