नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) भारत समेत एशिया प्रशांत क्षेत्र में मार्च से मई की अवधि के बीच डिलिवरी लागत में सालाना आधार पर लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ‘लॉजिस्टिक्स सॉफ्टवेयर’ सेवा क्षेत्र की कंपनी ‘फारआई’ ने एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
यह सर्वेक्षण पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद किया गया।
इस संघर्ष के कारण ईंधन की आपूर्ति तथा लागत पर दबाव है।
हाल ही में जारी रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘शोध से पता चलता है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र (एपीएसी) में डिलिवरी लागत में सालाना आधार पर औसतन 18.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत में ईंधन की कीमतें, वाहन चालकों का वेतन और शहरी भीड़भाड़ संरचनात्मक लागत बढ़ाने वाले कारक हैं, जिसके कारण यह आंकड़ा यहां के लिए चौंकाने वाला नहीं है।’’
भारत में घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में पहली बार में सफल रूप से डिलिवरी नहीं होने की दर 20-30 प्रतिशत तक हो सकती है, जो लाभ में कमी का एक प्रमुख कारण है।
भारत के त्वरित वाणिज्य क्षेत्र की बात करें तो, 10 मिनट और 20 मिनट में डिलिवरी कार्यों ने अरबों का निवेश आकर्षित किया है तथा तीन वर्षों से ‘लॉजिस्टिक्स’ के क्षेत्र में सुर्खियां बटोरी हैं।
भाषा यासिर अजय
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