नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों के बैंक खातों पर रोक लगा दी और कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए। न्यायालय ने यह कदम वरिष्ठ नागरिकों की ओर से अपने घरों का कब्जा पाने के लिए 20 साल से किए जा रहे संघर्ष पर गौर करते हुए उठाया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने नियामकीय प्राधिकारणों के ‘नरम रुख’ पर गहरी चिंता जताई और हरियाणा सरकार के प्रशासनिक तंत्र और बिल्डर के बीच ‘मिलीभगत’ का संकेत दिया।
यह मामला रीता टिक्कू (जो कैंसर से उबरी हैं) और लोकेश टिक्कू की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने गुरुग्राम के सेक्टर 53 में ‘पार्श्वनाथ एक्सोटिका’ परियोजना में अपने जीवन भर की बचत लगाई थी।
याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2006 में आवासीय इकाइयां (फ्लैट) आवंटित किए गए थे और 2007 की शुरुआत में फ्लैट खरीदार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
लगभग 1.78 करोड़ रुपये की पूरी कीमत चुकाने के बावजूद कब्जा कभी नहीं मिला, जबकि असल में 2013 में ही कब्जा मिल जाना था। दो दशक बाद भी परियोजना अधूरी पड़ी है।
याचिकाकर्ताओं ने पहले 2021 में ‘हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण’ से अपने पक्ष में आदेश हासिल किए थे, जिनमें मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि, बिल्डर ने न तो आदेश को चुनौती दी और न ही इनका पालन किया।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आदेशों को लागू करने की प्रक्रिया बेकार साबित हुई है।’’ उन्होंने कहा कि जब ‘हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण’ ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए, तो उन्हें कभी लागू नहीं किया गया।
न्यायालय को बताया गया कि एक मामले में, एक अदालत से जुड़े एक कर्मचारी को बिल्डर के परिसर में घुसने से शारीरिक रूप से रोका गया, जबकि स्थानीय पुलिस ने कोई प्रभावी मदद नहीं दी।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम आश्वश्स्त हैं कि कलेक्टर और स्थानीय पुलिस या तो बिल्डरों के साथ मिली हुई है या वे अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे हैं।’’
यह सुनिश्चित करने के लिए कि बिल्डर आगे न्याय से न बच सकें, पीठ ने तुरंत प्रभाव से पार्श्वनाथ हेसा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड और उनके प्रबंध निदेशकों व निदेशकों के निजी बैंक खातों पर रोक लगाने आदेश दिया।
पीठ ने प्रतिवादी कंपनियों के निदेशकों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए।
प्रधान न्यायाधीश ने चेतावनी दी कि अगर वे अगली तारीख पर पेश नहीं हुए, तो उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाएंगे।
उन्होंने हरियाणा के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस आयुक्तों से कहा कि वे इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और हलफनामे जमा करें।
भाषा संतोष रमण
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