नयी दिल्ली, 28 मार्च (मार्च) विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के कैमरून में चल रहे मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में ई-कॉमर्स के लिए सीमा शुल्क स्थगन को लेकर काफी ज्यादा मतभेद है। शोध संस्थान जीटीआरआई ने शनिवार को यह जानकारी दी।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि जहां अमेरिका मोहलत यानी स्थगन को स्थायी रूप से बढ़ाने पर जोर दे रहा है, वहीं भारत और अन्य विकासशील देश राजस्व नुकसान और नीतिगत बाधाओं का हवाला देते हुए इसका विरोध कर रहे हैं।
विश्व व्यापार संगठन का ई-कॉमर्स स्थगन एक अस्थायी समझौता है जिसमें सदस्य देश इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे जाने वाले माल/सेवाओं पर सीमा शुल्क न लगाने की प्रतिबद्धता जताते हैं
जीटीआरआई ने कहा, ‘‘सबसे ज्यादा मतभेद सीमा शुल्क पर ई-कॉमर्स के लिए जारी मोहलत को लेकर है। दो से चार साल का अस्थायी समझौता सबसे संभावित परिणाम जान पड़ता है।’’
कैमरून के याउंडे में डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का तीसरा दिन निर्णायक साबित हो रहा है। सम्मेलन में मंत्री चार क्षेत्रों… मत्स्य पालन सब्सिडी, निवेश सुविधा, ई-कॉमर्स और कृषि… पर बैठकें कर रहे हैं।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि चीन की अगुवाई में विकास के लिए निवेश सुविधा (आईएफडी) समझौते को लेकर छोटी-छोटी अनौपचारिक बैठकों में भारत पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की चिंता समझौते से ज्यादा उस मिसाल को लेकर है जो यह कायम करता है, यानी सीमित देशों के साथ समझौतों के लिए रास्ता खोलता है जो एक बार विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में शामिल हो जाने के बाद ‘ट्रोजन हॉर्स’ की तरह काम करते हैं और धीरे-धीरे संस्था के बहुपक्षीय स्वरूप को बदल देते हैं।”
श्रीवास्तव ने कहा कि मत्स्य पालन सब्सिडी पर बहुत कम प्रगति की उम्मीद है। इस मामले में मतभेद अभी भी कायम हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘डिजिटल व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विकास और बहुपक्षीय समझौतों से जुड़े तनावों के बीच, आज की चर्चा यह तय करेगी कि मंत्रिस्तरीय सम्मेलन एक मामूली समझौते में समाप्त होता है या विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के भीतर और भी गहरी दरारें उत्पन्न करता है।”
भाषा रमण
रमण