लखनऊ, पांच जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि पर्यावरण की उपेक्षा की कीमत आज पूरी मानवता चुका रही है।
योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विश्व पर्यावरण दिवस-2026 के अवसर पर विश्व बैंक समर्थित 2,741 करोड़ रुपये की लागत वाली भारत की पहली ‘एयरशेड’ आधारित ‘उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना’ की शुरुआत करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर परोक्ष हमला करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमने ‘हर घर में नल का पानी’ योजना को आगे बढ़ाया, लेकिन पता चला कि कोई टोटी चुरा रहा है।’’
इस मौके पर विश्व बैंक के साथ एक समझौता ज्ञापन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए।
विश्व बैंक में एशिया क्षेत्र की प्रैक्टिस मैनेजर एन जैनेट ग्लोबर व सीईओ यूपी कैंप बी. चंद्रकला ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) का हस्तांतरण किया।
बलिया स्थित सुरहा ताल देश का 100वां व उत्तर प्रदेश का 13वां ‘रामसर साइट्स’ बना।
योगी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “आज का दिन हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सामान्य बोलचाल की भाषा में कहा जाता है कि ‘जल है तो कल है, वन है तो जीवन है’। एक दूसरे के साथ जीवन चक्र जुड़ा हुआ है, लेकिन उनकी (पर्यावरण की) हमने सर्वाधिक उपेक्षा भी की है और उस उपेक्षा की कीमत आज पूरी मानवता चुका रही है।’’
उन्होंने कहा कि 40-45 या 50 वर्ष की उम्र का हर व्यक्ति यह महसूस करता है कि उसके जीवन के कालखंड में पर्यावरण के साथ हुए खिलवाड़ की कीमत को हम सब चुका रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी ने मौसम चक्र को बदलते हुए देखा होगा और आज से 25 वर्ष पहले मौसम का जो चक्र होता था, उसमें एक से डेढ़ महीने का अंतर आ गया है।
उन्होंने कहा कि अगर मौसम चक्र में अंतर आएगा तो सबसे अधिक प्रभावित किसान होगा और उसकी आमदनी पर असर पड़ेगा।
योगी ने कहा, “हमें अतिवृष्टि, अनावृष्टि का सामना करना पड़ेगा। खाद्यान्न का संकट खड़ा हो सकता है और पूरी दुनिया उन चीजों से चिंतित भी है।”
उन्होंने कहा कि असमय घटने वाली प्राकृतिक आपदाएं एक चेतावनी भी हैं जिनसे बचने के उपाय करने है।
मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिये बिना कहा, ‘‘हमने ‘हर घर में नल का जल’ योजना को आगे बढ़ाया, लेकिन पता चला कि कोई टोटी चुरा रहा है या उन्हें अन्य तरीकों से नुकसान पहुंचाया जा रहा है – जैसे नल को खुला छोड़ दिया जाना। हमें इसे रोकना चाहिए। अगर कोई नल चुरा रहा है या उसे बंद किए बिना चालू छोड़ रहा है तो हस्तक्षेप करना हमारी जिम्मेदारी है।’’
उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार ने भी समारोह को संबोधित किया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, योगी ने उत्तर प्रदेश में 100 आर्द्रभूमि की अधिसूचना से संबंधित संकलन व संबंधित पोर्टल की शुरुआत की।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के शुभंकर का भी अनावरण किया।
इस दौरान श्रावस्ती स्थित गुलरा (केन नाला) को ‘जैव विविधता विरासत स्थल’ के रूप में विकसित किए जाने की घोषणा की गई।
वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने मंच पर इसका प्रमाण पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से प्रकृति व जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया और तस्करों के प्रति सजग रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सजग नागरिकों का दायित्व है कि मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करें।
योगी ने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेशवासियों को पांच संकल्प भी दिलाए, जिसमें एक पेड़ मां के नाम लगाना, शरारती तत्वों व जीव-जंतुओं से पेड़ों की सुरक्षा, जल संरक्षण, एकल उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग न करना और प्रकृति के अनुरूप जीवन शैली अपनाना शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कटाक्ष किया, ‘‘कोई टोंटी चोरी कर रहा है, कोई पानी बर्बाद कर रहा है, ऐसे लोगों को टोकें। जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं, कोशिश हो कि पानी व्यर्थ न हो।’’
भाषा आनन्द जफर धीरज
धीरज