नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) सोयाबीन डी-आयल्ड केक (डीओसी) के निर्यात में आई भारी गिरावट के कारण दिसंबर में देश का डीओसी निर्यात सालाना आधार पर 3.98 लाख टन से 40 प्रतिशत घटकर 2.40 लाख टन रह गया।
उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने सोमवार को बयान में कहा कि सोयाबीन डीओसी का निर्यात दिसंबर में घटकर 1.14 लाख टन रह गया जो दिसंबर 2024 में 2.78 लाख टन था।
सरसों डीओसी का निर्यात सालाना आधार पर 88,746 टन से घटकर 71,452 टन रह गया जबकि अरंडी डीओसी का निर्यात 28,452 टन से घटकर 21,904 टन रह गया। मूंगफली डीओसी का निर्यात 3,050 टन से घटकर 1,609 टन रह गया।
एसईए के आंकड़ों के अनुसार, चावल भूसी डीओसी का निर्यात हालांकि सालाना आधार पर पहले के मात्र 70 टन से बढ़कर 31,237 टन हो गया।
अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान, कुल डीओसी निर्यात पिछले वर्ष के 31.50 लाख टन से छह प्रतिशत घटकर 29.75 लाख टन रह गया।
एसईए ने कहा कि भारत में सरसों की पेराई में गिरावट और हाल ही में वैश्विक कीमतों में हुई वृद्धि से भारतीय सरसों डीओसी की चीन की मांग में कमी आएगी।
भारत ने अप्रैल-दिसंबर के दौरान चीन को 6.85 लाख टन सरसों डीओसी का निर्यात किया जो पिछले वर्ष के 26,327 टन से काफी अधिक है।
एसईए ने बताया कि कई कंपनियों को भारत की निर्यात निरीक्षण परिषद के माध्यम से चीन की जीएसीसी से सरसों डीओसी के निर्यात की अनुमति मिल गई है।
यूरोपीय खरीदारों के समर्थन के बावजूद कीमतों में प्रतिस्पर्धा कम होने के कारण पिछले दो महीनों में सोयाबीन डीओसी का निर्यात 2.28 लाख टन रहा जबकि एक साल पहले यह 4.62 लाख टन था।
घरेलू सोयाबीन डीओसी विनिर्माताओं को पशु आहार बनाने वालों से कमजोर मांग का सामना करना पड़ रहा है जो मक्का और चावल से एथनॉल उत्पादन के उप-उत्पाद, सस्ते ‘डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स’ (डीडीजीएस) को प्राथमिकता देते हैं।
एसईए के अनुसार, चीन, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश और जर्मनी भारतीय सोयाबीन डीओसी के प्रमुख आयातक हैं।
भाषा राखी राजेश निहारिका रमण राजेश
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