Randeep Surjewala Press Conference/Image Credit: @INCIndia X Handle
Randeep Surjewala Press Conference: नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर कई गंभीर आरोप लगा रहा है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत कई अन्य नेता इस ट्रेड डील पर सवाल उठा चुके हैं। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि, समझौता भारतीय किसानों के साथ विश्वासघात कर सकता है। वहीं अब कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala Press Conference) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई बड़े मुद्दे उठाए हैं।
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, व्यापार समझौते आर्थिक तरक्की का रास्ता होते हैं। व्यापार समझौतों का आधार ही दो देशों की बराबरी की शर्तों पर परस्पर लोकहित है। उन्होंने आगे कहा कि, व्यापार समझौते देश की संप्रभुता को त्याग कर, गुलामी का रास्ता कभी नहीं हो सकते। व्यापार समझौतों की आड़ में देशहित और लोकहित दोनों की बलि नहीं दी जा सकती। इन्हीं वजहों के चलते हम अंग्रेजों से भी लड़े थे। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में मोदी सरकार ने देश और किसानों की बलि दे दी। भारत की ऊर्जा सुरक्षा से सरेआम खिलवाड़ किया। (Randeep Surjewala Press Conference) मोदी सरकार ने भारत की डिजिटल स्वायत्तता व डेटा प्राइवेसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। भारतीय हितों की रक्षा में मजबूती से खड़े होने के बजाए इस मजबूर सरकार ने भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता से समझौता कर लिया। कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि, देश पूछ रहा है कि, ये ‘मजबूत’ सरकार है या ‘मजबूर’ सरकार और ये भारत ‘आत्मनिर्भर’ या ‘अमेरिका-निर्भर’
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि, ट्रेड डील में भारत की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया है। 6 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने पेनल्टी टैरिफ के आदेश में लिखा- भारत ने अमेरिका से वादा किया है कि वह रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा। ट्रंप ने ये भी लिखा- अमेरिका ये निगरानी करेगा कि भारत प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर, रूस से कच्चा तेल न खरीदे। अगर ऐसा हुआ तो पेनल्टी दोबारा लगा दी जाएगी 9 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा जारी फैक्ट शीट में भी भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल न खरीदने का वादा करने की बात दोहराई गई। (Randeep Surjewala Press Conference) 14 फरवरी, 2026 को म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत ने रूस से कच्चा तेल न खरीदने का सशर्त वादा किया है। अमेरिका मई, 2024 में पाबंदी लगा चुका है कि भारत, ईरान से भी कच्चा तेल नहीं खरीद सकता, जिसे मोदी सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है, जो हमारी ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा है। हम 40% कच्चा तेल रूस और 11% कच्चा तेल ईरान से आयात करते थे। यानी कुल जरूरत का लगभग 51%, फरवरी 2022 से जनवरी 2026 के बीच भारत ने रूस से 15.24 लाख करोड़ रुपए का कच्चा तेल आयात किया और सस्ती दरों के कारण लगभग 1.81 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई। अब ट्रंप के कहने पर मोदी सरकार अमेरिका और वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदेगी, लेकिन रेट सस्ता नहीं होगा। ऐसे में उन्होंने पूछा कि, क्या ये भारत की आत्मनिर्भरता के साथ खिलवाड़ नहीं है?
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने एक और बड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि, अमेरिका ने बांग्लादेश से एक व्यापार समझौता किया, उसमें साफ-साफ लिखा है कि बांग्लादेश, अमेरिकी कपास व धागा आयात कर जो कपड़ा व वस्त्र अमेरिका को निर्यात करेगा, उस पर अमेरिका में 0% शुल्क लगेगा। इसके उलट, हमारे यानी भारत के निर्यात पर 18% शुल्क लगेगा, जबकि भारत कपड़ा व वस्त्र का सबसे बड़ा निर्यातक है। ऐसा हुआ तो इसका असर तिरुपुर, सूरत, पानीपत, लुधियाना समेत पूरे देश के वस्त्र उद्योग पर पड़ेगा। मगर 12 फरवरी, 2026 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Randeep Surjewala Press Conference) ने सार्वजनिक तौर से देश को बताया कि भारत भी अमेरिका से कपास आयात कर जो कपड़ा वा वस्त्र निर्यात करेगा, उसे भी बांग्लादेश के बराबर राहत मिलेगी। यानी अब अमेरिकी कपास के भारत में निशुल्क आयात का दरवाजा भी मोदी सरकार ने खोल दिया है।
इसके अलावा- बांग्लादेश, भारत से करीब 50% कपास आयात करता है। मगर अब कपास का भारत से बांग्लादेश को निर्यात भी बंद हो जाएगा, जो कि हमारे किसान पर दोहरी मार होगी। पीयूष गोयल भले न बता रहे हों लेकिन मोदी सरकार ने समझौते से पहले ही अमेरिका से भारत में कपास का आयात शुरू कर दिया था। आंकड़ों के मुताबिक- भारत ने कपास होते हुए भी साल 2024-25 में अमेरिका से ₹3,428 करोड़ का कपास आयात कर लिया है। अगर ये आंकड़ा ₹3,428 करोड़ से बढ़कर ₹20,000 करोड़ हो जाएगा तो हमारे कपास का क्या होगा? इस साल भारत में कपास की MSP ₹6100 प्रति क्विंटल थी, लेकिन कपास ₹5045 प्रति क्विंटल की कीमत पर बिका।
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने सवाल पूछा कि, अगर अमेरिकी कपास का आयात होगा, तो महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक के कपास पैदा करने वाले किसानों का क्या होगा? व्यापार समझौते में अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर का सामान खरीदने की भारत पर पाबंदी लगाई गई है- क्या यह देशहित है? आंकड़ें देखें तो साल 2024 में भारत ने अमेरिका को 81 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सामान निर्यात किया और 43 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सामान आयात किया यानी, अमेरिका से भारत का ट्रेड सरप्लस 38 बिलियन डॉलर है। जब 13 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका गए, तो एक साझा बयान जारी कर कहा गया था कि दोनों देश अपना ‘परस्पर व्यापार’ 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाएंगे, लेकिन अब 6 फरवरी, 2026 के व्यापार (Randeep Surjewala Press Conference) समझौते में इसे पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया और कहा गया कि भारत अगले 5 साल तक हर साल 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 9 लाख करोड़ रुपए का अमेरिकी सामान खरीदेगा। यानी भारत 5 साल में 45 लाख करोड़ रुपए का अमेरिकी सामान खरीदेगा
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार से सवाल पूछा कि, ये व्यापार समझौता बराबरी के आधार पर हुआ है या जबरदस्ती के आधार पर- देश जवाब मांग रहा है। भारत, अमेरिका व दूसरे देशों से GM Crops आयात करने की अनुमति नहीं देता, क्योंकि इससे भारत में बीज शुद्धता-प्रजातियां नष्ट हो जाती है। अगर भारत में प्रोसेस्ड मक्का, ज्वार, सोयाबीन, फल व अन्य उत्पाद भी आएंगे, तो क्या उनका सीधा प्रभाव भारत की जैविक विविधता और बीज शुद्धता पर नहीं पड़ेगा? क्या मोदी सरकार ने पिछले दरवाजे से भारत में GM Crops के लिए रास्ते खोल दिए हैं? क्या भारत की जैविक विविधता व बीज शुद्धता पर पड़ने वाले गंभीर असर के बारे में सोचा गया है?
व्यापार समझौते में ‘नॉन-ट्रेड बैरियर्स’ को हटाने का मतलब किसान की सब्सिडी को हटाना व GM Crops को मंजूरी देकर, बीज शुद्धता व जैविक विविधता पर सवाल पैदा करना होगा। व्यापार समझौते के 5वें बिंदु में साफ लिखा है कि अमेरिका की चिंताओं को देखते हुए भारत अपने नॉन-टैरिफ ट्रेड बैरियर हटाएगा। अमेरिका अपने किसान को सालाना करीब ₹1.45 लाख करोड़ की सब्सिडी देता है। इसके उलट- भारत में प्रति किसान परिवार ₹6,000 की सब्सिडी दी जाती है, मगर महंगे डीजल, खाद, बिजली और कीटनाशक दवाईयों के जरिए ₹25,000 वापस ले लिए जाते हैं। (Randeep Surjewala Press Conference) इसके बावजूद भी नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से समझौता किया है कि हम किसान की सब्सिडी कम करेंगे और GM Crops को मंजूरी दे देंगे। भारत से बांग्लादेश को सालाना 24,550 करोड़ रुपए का कपास व धागा निर्यात किया जाता है। अगर बांग्लादेश, अमेरिका से कपास व धागा मंगवाने लगे, तो भारत के कपास उत्पादक किसान व कपड़ा बनाने वाले कारखानों का क्या होगा?
अमेरिका से आयात किए जाने वाले खाद्य व कृषि उत्पादों में ‘एडिशनल प्रोडक्ट्स’ लिखा गया है। मतलब मोदी सरकार अमेरिका से खाद्य और कृषि उत्पादों के अलावा भी सामान मंगवाएगी। ऐसे में देश जानना चाहता है कि वो ‘अतिरिक्त उत्पाद’ कौन से हैं? डील के मुताबिक अब सेब, संतरा, चेरी, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी जैसी चीजें अमेरिका से आएंगी। ऐसे में ये फल उगाने वाले भारत के किसानों का बहुत नुकसान होगा।
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने आगे कहा कि, मोदी सरकार ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत के हित को (Randeep Surjewala Press Conference) दांव पर लगा दिया है। इसमें खेती, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार की शर्त है। 6 फरवरी, 2026 के पहले फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में ही सहमति जताई गई है कि भारत बिना किसी आयात शुल्क के अमेरिका के खाद्य व कृषि उत्पादों के लिए हमारा बाजार खोल देगा।
ड्राईड डिस्टिलर ग्रेन
ये प्रोसेस्ड मक्का है। भारत में 2025-26 के दौरान 4.30 करोड़ मीट्रिक टन मक्के का उत्पादन हुआ। भारत में मक्का कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, गुजरात में पैदा होता है। वहीं, अमेरिका 42.50 करोड़ मीट्रिक टन मक्का पैदा करता है, जिसे बेचने के लिए वो भारत जैसा बड़ा बाजार ढूंढ रहा है। अगर अमेरिका से ड्यूटी-फ्री मक्के के लिए भारत के बाजार खोल दिए गए, तो देश के किसानों का क्या होगा?
भारत में इस साल 52 लाख मीट्रिक टन ज्वार हुआ। भारत में ज्वार पैदा करने वाले सबसे बड़े राज्य हैं- महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व गुजरात। वहीं, अमेरिका 87 लाख मीट्रिक टन सालाना ज्वार उत्पादन करता है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। अगर अमेरिका का ड्यूटी-फ्री ज्वार भारत के बाजार में बिकेगा, तो फिर भारत के किसानों (Randeep Surjewala Press Conference) का क्या होगा?
भारत का सालाना सोयाबीन उत्पादन 153 लाख टन ( साल 2024-25) है। भारत में सोयाबीन की पैदावार ज्यादातर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान व कर्नाटक में होती है। वहीं, अमेरिका में हर साल करीब 12 करोड़ मीट्रिक टन सोयाबीन होता है। ऐसे में क्या अमेरिका से ड्यूटी-फ्री सोयाबीन का आयात होने से भारत के साधारण किसानों की आजीविका पर असर नहीं पड़ेगा?
LIVE: Press briefing by Shri @rssurjewala at Congress office, New Delhi. https://t.co/meOP8stERh
— Congress (@INCIndia) February 16, 2026
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