नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) बाजार अनुसंधान फर्म बिगमिंट के अनुसार कच्चे माल विशेषकर कोकिंग कोल के महंगा होने और मानसून के बाद मांग बढ़ने से घरेलू इस्पात की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
फर्म ने एक रिपोर्ट में कहा कि चालू वित्त वर्ष की बाकी तिमाहियों में भी यह रुख जारी रहने की उम्मीद है।
बिगमिंट के आंकड़ों के अनुसार हॉट रोल्ड कॉइल (एचआरसी) और कोल्ड रोल्ड कॉइल (सीआरसी) क्रमशः 64,000 रुपये प्रति टन और 75,000 रुपये प्रति टन के भाव पर बिक रहे हैं। इससे पहले ऐसे दाम जून 2022 में देखे गए थे। ये विश्व स्तर पर सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले दो सपाट इस्पात उत्पाद हैं।
एक अगस्त से एचआरसी और सीआरसी की कीमतों में क्रमशः 6,000 रुपये प्रति टन और 8,500 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है। अगस्त की शुरुआत में एचआरसी 58,000 रुपये प्रति टन और सीआरसी 66,500 रुपये प्रति टन पर थी।
बिगमिंट के एक विश्लेषक ने कहा कि कीमतों में यह उछाल मुख्य रूप से प्रमुख कच्चे माल की लागत बढ़ने और मांग में तेजी के कारण आया है।
आयात किए जाने वाले कोकिंग कोल की कीमत महज एक महीने में करीब 65 डॉलर प्रति टन बढ़कर 305 डॉलर प्रति टन हो गई है। वहीं, लौह अयस्क फाइन की कीमतों में 200 से 250 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 4,500 रुपये प्रति टन पर पहुंच गया है।
ब्लास्ट फर्नेस पद्धति से इस्पात उत्पादन की लागत में अकेले कोकिंग कोल की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक होती है।
भाषा पाण्डेय
पाण्डेय