नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) फिच रेटिंग्स ने बुधवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में रेटिंग वाली कंपनियों की कुल आमदनी में करीब नौ प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जिसके पिछले वित्त वर्ष में पांच प्रतिशत रहने का अनुमान है।
इस वृद्धि से भारतीय कंपनियों की कर्ज लेने की क्षमता के स्थिर बने रहने की संभावना है।
हालांकि, फिच ने कहा कि कुछ कंपनियां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ने से प्रभावित हो सकती हैं। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को नुकसान हो सकता है और उनकी कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ सकती है, जिससे उनके मुक्त नकदी प्रवाह पर दबाव पड़ेगा।
रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘रसायन क्षेत्र की कंपनियों को अधिक लागत, कमजोर मांग और महंगी लॉजिस्टिक लागत का सामना करना पड़ सकता है। हमारा मानना है कि इससे जुड़ी महंगाई और कमज़ोर आर्थिक विश्वास के कारण उपभोक्ता खर्च और प्रौद्योगिकी पर होने वाले गैर-ज़रूरी खर्च में भी कमी आएगी।’’
फिच ने कहा कि अल नीनो के उभरते जोखिम और कमजोर मानसून से नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में पवन ऊर्जा उत्पादन घट सकता है, जबकि रसायन कंपनियों के फसल सुरक्षा उत्पादों की मांग पर भी असर पड़ सकता है। इससे खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने, ग्रामीण आय घटने और ग्रामीण मांग कमजोर पड़ने की आशंका भी रहेगी।
फिच ने अपनी रिपोर्ट ‘इंडिया कॉरपोरेट्स क्रेडिट ट्रेंड्स: जुलाई 2026’ में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में फिच रेटिंग्स के पोर्टफोलियो में शामिल भारतीय कंपनियों के लिए कर्ज की क्षमता स्थिर रहने की उम्मीद है। कुछ क्षेत्रों में लागत बढ़ने और कर पूर्व आय (ईबीआईटीडीए) मार्जिन पर दबाव के बावजूद तेज आय वृद्धि भारतीय कंपनियों की वित्तीय स्थिति को सहारा देगी।
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यासिर अजय
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