अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया स्थिर रहा, 91.99 प्रति डॉलर पर हुआ बंद

Ads

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया स्थिर रहा, 91.99 प्रति डॉलर पर हुआ बंद

  •  
  • Publish Date - January 29, 2026 / 09:16 PM IST,
    Updated On - January 29, 2026 / 09:16 PM IST

मुंबई, 29 जनवरी (भाषा) विदेशी कोषों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा कमजोर होने के बीच, अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 91.99 पर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब बंद हुआ।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 92 के अपने अब तक के सबसे निचले दिन के कारोबार के निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भी रुपये पर दबाव पड़ा।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में, रुपया 91.95 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 91.82 के उच्चस्तर पर पहुंचा, लेकिन बाद में इसमें गिरावट आई और यह डॉलर के मुकाबले 92 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

कारोबार के अंत में रुपया 91.99 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के समान है।

बुधवार को, रुपया 31 पैसे की गिरावट के साथ बंद हुआ था, और डॉलर के मुकाबले 91.99 के अपने अब तक के सबसे निचले बंद स्तर पर फिर से पहुंच गया। 23 जनवरी को, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के अपने अब तक के सबसे दिन के कारोबार के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक समीक्षा पेश की, जिसमें बाहरी क्षेत्र से जोखिमों और विदेशी पूंजी निकासी पर चिंता जताई गई।

इस बीच, दुनिया की छह प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला, डॉलर इंडेक्स 0.07 प्रतिशत गिरकर 96.37 पर कारोबार कर रहा था।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार में 1.83 प्रतिशत गिरकर 69.64 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

चॉइस वेल्थ के शोध एवं उत्पाद प्रमुख, अक्षत गर्ग ने कहा, ‘‘लगातार डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी, और विदेशी कोषों की निकासी ने मिलकर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बनाए रखा है, और रुपया भी इसका अपवाद नहीं है।’’

गर्ग ने आगे कहा कि आयातकों की मासांत की डॉलर मांग और एहतियाती हेजिंग ने इस गिरावट को और बढ़ा दिया है। हालांकि, रिजर्व बैंक के पास अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन अव्यवस्थित बाजार स्थितियों के अभाव में किसी भी विशिष्ट स्तर का आक्रामक रूप से बचाव करने की संभावना नहीं है।

गर्ग ने कहा, ‘‘निवेशकों को मौजूदा गिरावट को भारत के आर्थिक दृष्टिकोण में ढांचागत गिरावट के बजाय वैश्विक पुनर्समायोजन के एक चरण के रूप में देखना चाहिए।’’

घरेलू शेयर बाजार में, सेंसेक्स 221.69 अंक चढ़कर 82,566.37 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 76.15 अंक बढ़कर 25,418.90 पर पहुंच गया।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बृहस्पतिवार को 393 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, रुपये की कीमत, जो 92 प्रति डॉलर तक गिर गई है, भारत के शानदार आर्थिक बुनियाद को सही ढंग से नहीं दिखाती है।

भाषा राजेश पाण्डेय

पाण्डेय