नयी दिल्ली, नौ मई (भाषा) दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को कारोबार में गिरावट का रुख देखने को मिला। मंडियों में सरसों की आवक बढ़ने और विदेशी बाजारों में मंदी के कारण सरसों, मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट आई। वहीं दूसरी ओर सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं।
बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में कोई घट-बढ़ नहीं है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात लगभग सवा प्रतिशत की गिरावट थी और इस वक्त एक प्रतिशत की गिरावट चल रही है।
सूत्रों ने कहा कि सस्ता होने के कारण देश में सूरजमुखी तेल का भारी मात्रा में आयात कर लिया गया है। इस आयात का आकार इतना अधिक है कि किसान, तेल उद्योग और उपभोक्ता सभी परेशान हैं। सबसे बड़ी दिक्कत, देशी तिलहन पैदा करने वाले किसानों की है जिनकी फसल सस्ते आयातित तेलों की प्रचुरता की वजह से मंडियों में खप नहीं रही है। सस्ते आयातित तेलों की भारी मात्रा में मौजूदगी के कारण पेराई मिलों को देशी तिलहन की पेराई में नुकसान है जिनके तेल लागत अधिक होने के कारण बाजार में खपना मुश्किल हो गया है। अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की आड़ में इन आयातित तेलों को अब भी खुदरा बाजार में महंगे में बेचे जाने के कारण वैश्विक कीमतों में आई गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को यथोचित मात्रा में नहीं मिल पा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि सेन्ट्रल आर्गेनाइजेशन फॉर आयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (सीओओआईटी) के चेयरमैन सुरेश नागपाल ने सरसों जैसे देशी तिलहन के बाजार बनाने के लिए सस्ते आयातित तेलों को नियंत्रित करने और उन तेलों पर आयात शुल्क को 20 प्रतिशत बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में दिये जाने वाले खाद्य तेल में सरसों को अनिवार्य किये जाने की भी मांग की है ताकि किसानों को लाभ हो।
सूत्रों ने कहा कि दिल्ली में सरसों के थोक भाव 94 रुपये लीटर है और यह खुदरा में अधिकतम 110-115 रुपये लीटर बिकना चाहिये।
सूत्रों ने बताया कि नरेला और नजफगढ़ मंडी में छोटे किसानों की तरफ से सरसों की आवक बढ़ी है। इसके अलावा सस्ते आयातित तेलों की वजह से सरसों तेल- तिलहन में गिरावट है। मूंगफली तेल-तिलहन भी सस्ते आयातित तेलों के कारण मामूली गिरावट के शिकार हुए हैं। इस कारण सोयाबीन और देशी बिनौला तेल कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली। सस्ते आयातित तेल किसी अन्य तेल को बाजार में टिकने नहीं दे रहे हैं। जबकि डीआयल्ड केक (डीओसी) की साधारण मांग होने से सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर रहे। महंगा होने के बीच मांग कुछ कमजोर रहने से सीपीओ और पामोलीन भी पूर्वस्तर पर टिके रहे।
सूत्रों ने कहा कि सरकार को हल्के तेलों (देश के तेल तिलहन बाजार पर सबसे अधिक असर डालने वाले- सूरजमुखी और सोयाबीन तेल) तथा पाम एवं पामोलीन तेल के बीच कीमत अंतर को दुरुस्त करना होगा नहीं तो पाम एवं पामोलीन का आयात प्रभावित होगा।
मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 5,100-5,200 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 6,680-6,740 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,520 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,495-2,760 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 9,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,615-1,695 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,615-1,725 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,430 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,850 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 9,000 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,300 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,400 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,500 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,410-5,460 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,160-5,240 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय