नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि इस साल खरीफ की पैदावार पर अल नीनो का असर ज्यादा होने की संभावना नहीं है, क्योंकि कुछ इलाकों में कम बारिश के बावजूद बुवाई रकबे का अंतर कम हो रहा है।
एक कार्यक्रम के बाद संवाददाता सम्मेलन में चौहान ने कहा कि देश के ज्यादातर हिस्सों में खरीफ फसलों के बढ़ने के हिसाब से पर्याप्त बारिश हुई है, जिससे जोखिम वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर लगभग 100 रह गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ जगहों को छोड़कर हमें अल नीनो का कोई बड़ा असर नहीं दिख रहा है। कुल मिलाकर स्थिति अच्छी है। फसलों की पानी की पूरी जरूरतें पूरी करने के लिए बारिश पर्याप्त हुई।’’
मंत्री ने कहा कि बुवाई वाले क्षेत्र में जो कमी पिछले सप्ताह 11 प्रतिशत थी, वह अब कम हो गई है और इसके और कम होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अब भी स्थिति की समीक्षा करनी है क्योंकि यह रोज बदल रही है।’’
कम बारिश के खरीफ की पैदावार पर असर के बारे में पूछे जाने पर चौहान ने कहा, ‘‘अभी तक हमें कोई असर नहीं दिख रहा है।’’ उन्होंने बताया कि कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में पानी की कमी है, लेकिन कहा कि कुल मिलाकर बुवाई अच्छी रही है और केवल स्थानीय स्तर पर असर पड़ने की उम्मीद है।
मंत्री ने यह भी कहा कि बीज विधेयक और कीटनाशक प्रबंधन विधेयक मसौदे के रूप में तैयार हैं और सरकार के कृषि क्षेत्र सुधारों के तहत अगले सत्र में संसद में पेश किए जाएंगे।
14 अगस्त तक, खरीफ फसलों की बुवाई, औसत बुवाई क्षेत्र के 92 प्रतिशत हिस्से पर पूरी हो चुकी थी, और कुल बुवाई रकबा 1,016.57 लाख हेक्टेयर था – जो एक साल पहले की तुलना में दो प्रतिशत कम है। बुवाई, जो आमतौर पर जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ तेजी पकड़ती है, इस साल अल नीनो की स्थितियों के कारण देरी से शुरू हुई।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 12 अगस्त तक कुल मानसून की कमी 12 प्रतिशत रही। सबसे ज्यादा कमी पूर्वी और पूर्वोत्तर इलाकों में 26 प्रतिशत देखी गई, इसके बाद दक्षिणी प्रायद्वीप में 19 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 प्रतिशत कमी रही।
इससे पहले, पूसा परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में, चौहान ने कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के अधिकारियों को ‘शक्ति की सप्त धारा’ (सशक्तीकरण की सात धाराएं) के तहत शपथ दिलाई। इस ढांचे की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में की थी।
भाषा राजेश राजेश अजय
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