राज्यों में चुनावी लोकलुभावन योजनाओं से सरकार की उधारी लागत पर प्रभावः सीईए

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राज्यों में चुनावी लोकलुभावन योजनाओं से सरकार की उधारी लागत पर प्रभावः सीईए

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  • Publish Date - January 29, 2026 / 07:31 PM IST,
    Updated On - January 29, 2026 / 07:31 PM IST

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) राज्यों में चुनावों के समय लोकलुभावन योजनाओं और बिना-शर्त नकद अंतरण पर खर्च बढ़ने से राज्यों की राजकोषीय अनुशासनहीनता बढ़ सकती है जिसका असर देश की सरकारी उधारी लागत पर भी पड़ सकता है। बृहस्पतिवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई।

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने आर्थिक समीक्षा पेश होने के बाद संवाददाताओं से चर्चा में कहा कि परिवारों को नकद राशि दिए जाने की आर्थिक गतिविधियों में एक भूमिका होती है, लेकिन इसका प्रभाव तभी अधिक होता है जब इसे उत्पादकता बढ़ाने वाले निवेश के साथ जोड़ा जाए।

उन्होंने कहा, “वृद्धि बनाए रखने के लिए राज्यों को राजस्व व्यय के भीतर अपनी प्राथमिकताएं नए सिरे से तय करनी होंगी, ताकि अल्पकालिक आय समर्थन उन निवेश को कमजोर न करे जिन पर समावेशी एवं मध्यम अवधि की समृद्धि आधारित है।”

नागेश्वरन ने कहा कि राज्य के स्तर पर किसी भी तरह की वित्तीय अनुशासनहीनता सरकार के स्तर पर उधारी की लागत को भी प्रभावित करती है।

आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, जहां केंद्र सरकार ने राजकोषीय मजबूती के साथ रिकॉर्ड सार्वजनिक निवेश भी किया है, वहीं कई राज्यों में बढ़ते राजस्व घाटे और बिना शर्त नकद अंतरण वृद्धि-उन्मुख खर्च को पीछे धकेलने का जोखिम पैदा कर रहे हैं।

समीक्षा में कहा गया कि भारतीय सरकारी बॉन्ड अब वैश्विक सूचकांकों में शामिल हो चुके हैं और निवेशक अब केवल केंद्र सरकार नहीं, बल्कि सामान्य सरकारी वित्त का आकलन कर रहे हैं। ऐसे में राज्यों की कमजोर वित्तीय स्थिति को अब स्थानीय समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

समीक्षा के मुताबिक, बिना शर्त नकद हस्तांतरण का दीर्घकालिक आर्थिक नुकसान अधिक हो सकता है, क्योंकि इससे कौशल विकास, रोजगार क्षमता और खुद के सुधार के लिए प्रोत्साहन कमजोर पड़ सकता है।

सीईए ने ‘आसानी से पैसे की उपलब्धता’ (ईजी मनी) वाले दौर के बारे में कहा कि अत्यधिक शिथिल मौद्रिक नीति ने परिसंपत्तियों के मूल्यांकन को असंतुलित किया है, बाजार में संकेंद्रण का जोखिम बढ़ाया है और कम विनियमित पूंजी स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाई है।

उन्होंने कहा कि 2008 के बाद का ‘ईजी मनी’ दौर वर्ष 2022 और 2023 में उच्च मुद्रास्फीति का कारण बना और शेयर बाजार को भी काफी महंगा कर दिया।

उन्होंने कहा, “शेयर बाजार के मूल्यांकन मार्च, 2000 में ‘टेक कंपनियों का गुब्बारा’ फूटने से पहले के स्तर तक पहुंच गए थे।”

नागेश्वरन ने मौजूदा बाजार जोखिमों के बारे में आगाह करते हुए कहा कि ये जोखिम कुछ गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों के वर्चस्व और बैंकों से हटकर अपेक्षाकृत कम विनियमित गैर-बैंक स्रोतों की तरफ वैश्विक वित्तीय प्रवाह के कारण और बढ़ रहे हैं।

रोजगार के मोर्चे पर सकारात्मक संकेतों की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि बेरोजगारी दर छह प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 3.2 प्रतिशत रह गई। इसके अलावा महिला श्रम बल भागीदारी में लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

नागेश्वरन ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में बेरोजगारी दर में लगातार गिरावट आई है और यह 5.4 प्रतिशत से घटकर अंतिम तिमाही में 4.9 प्रतिशत पर आ गई है।

उन्होंने वैश्विक परिदृश्य में भारत को आर्थिक प्रदर्शन का ‘ओएसिस’ (यानी मुश्किल हालात में सुकून देने वाली जगह) करार दिया।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय