एंब्रेयर के सीईओ ने भारत को केसी-390 विमान का वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता जताई

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एंब्रेयर के सीईओ ने भारत को केसी-390 विमान का वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता जताई

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  • Publish Date - February 22, 2026 / 06:05 PM IST,
    Updated On - February 22, 2026 / 06:05 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

(मानस प्रतिम भुइयां)

नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) ब्राजील की विमानन कंपनी एंब्रेयर ने रविवार को कहा कि अगर उसे भारतीय वायु सेना का 80 परिवहन विमानों का अनुबंध मिलता है, तो वह अपने केसी-390 मिलेनियम विमानों के लिए एक बड़ा विनिर्माण केंद्र स्थापित करने के लिए तैयार है।

एंब्रेयर के अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) फ्रांसिस्को गोम्स नेटो ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार ने केसी-390 मिलेनियम को भारत के लिए सबसे अच्छा विकल्प बताया।

उन्होंने कहा कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्यों देशों द्वारा इस विमान को अपनाने के बाद इसे अब वैश्विक मानक के रूप में देखा जा रहा है।

एंब्रेयर के सीईओ नेटो ने कहा, ‘हमारा विमान चुनने से भारतीय वायु सेना आधुनिक और तेजी से बढ़ रही दूसरे देशों की वायु सेनाओं के साथ समन्वय रख सकेगी।’

उन्होंने कहा कि अगर भारत का अनुबंध एंब्रेयर को मिलता है, तो कंपनी भारत को अपने विमान विनिर्माण का मुख्य केंद्र बनाएगी, ताकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

एंब्रेयर के सीईओ ने यह भी बताया कि कंपनी भारत में केसी-390 संचालकों के लिए एक विशेष क्षेत्रीय एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल) केंद्र स्थापित करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही कंपनी रक्षा और नागर विमानन क्षेत्रों में भारत के साथ दीर्घकालिक सहयोगात्मक संबंध बनाने की योजना भी बना रही है।

शीर्ष अधिकारी ने कहा कि स्वीडन, नीदरलैंड और पुर्तगाल समेत कई प्रमुख नाटो सदस्यों द्वारा केसी-390 को अपनाने के कारण इसे लॉकहीड मार्टिन के सी-130जे विमान के लंबे समय से चल रहे प्रभुत्व का रणनीतिक विकल्प माना जा रहा है।

उन्होंने बताया कि केसी-390 नई पीढ़ी का परिवहन और हवाई ईंधन भरने वाला विमान है। यह जेट इंजन से संचालित होता है और 26 टन तक भार उठा सकता है, जबकि सी-130जे केवल 20 टन का भार उठा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘यह विमान तेज है, अधिक भार उठा सकता है, लंबी दूरी तय कर सकता है और इसके संचालन में खर्च भी कम है। इसके इस्तेमाल से कम विमानों में वही कार्य किए जा सकते हैं।’

उन्होंने भारत-ब्राजील संबंधों में सुधार और दीर्घकालिक सहयोग पर भी जोर देते हुए कहा कि केसी-390 परियोजना दोनों देशों के भविष्य की दृष्टि के अनुकूल है। उन्होंने यह भी कहा कि एंब्रेयर के विमान को यूरोप के नौ देशों ने अपनाया है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय वायु सेना ने 2022 में मध्यम आकार के परिवहन विमान (एमटीए) की खरीद को सूचना के लिए अनुरोध (आरएफआई) जारी किया था। भारतीय वायु सेना अपने पुराने एएन-32 और आईएल-76 विमानों को बदलना चाहती है।

भारतीय वायु सेना की योजना करीब 80 सैन्य परिवहन विमान खरीदने की है। यह सौदा अरबों डॉलर का होगा। समझा जाता है कि इसे अगले कुछ माह में रक्षा खरीद परिषद की मंजूरी मिल जाएगी।

केसी-390 मिलेनियम के अलावा इस सौदे के लिए एयरबस डिफेंस ओर स्पेस का ए-400 एम विमान तथा लॉकहीड मार्टिन का सी-130 जे सुपर हरक्यूल्स भी दौड़ में हैं। भारतीय वायु सेना पहले ही 12 सी-130 जे सुपर हरक्यूल्स का इस्तेमाल कर रही है।

एम्ब्रेयर नागर विमानन क्षेत्र में भी सक्रिय है। ब्राजील की यह कंपनी और अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारत के क्षेत्रीय परिवहन विमान (आरटीए) कार्यक्रम के लिए ई175 क्षेत्रीय विमान की अंतिम संयोजन लाइन स्थापित करने के लिए विस्तारित समझौता किया है।

दोनों कंपनियां मिलकर विमान निर्माण, आपूर्ति श्रृंखला, मरम्मत सेवाओं, पायलट प्रशिक्षण और ऑर्डर सुनिश्चित करने सहित सभी पहलुओं पर काम कर रही हैं ताकि भारत में एक एकीकृत आरटीए परिवेश विकसित किया जा सके।

भाषा योगेश अजय

अजय