नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) लेखिका नयनतारा रॉय ने अपने पहले उपन्यास ‘‘द मैग्निफिसेंट रुइन्स’’ में परिवार, पहचान और प्रवासियों के जीवन से जुड़े अनुभव को गहराई से प्रस्तुत किया है।
यह उपन्यास भारत में रविवार को जारी किया गया।
इस पुस्तक को ‘हैशेट इंडिया’ द्वारा प्रकाशित किया गया है। इसकी कहानी कई पीढ़ियों तक फैली हुई एक विस्तृत गाथा है, जिसकी पृष्ठभूमि ब्रुकलिन और कोलकाता के बीच घूमती है।
यह कहानी ब्रुकलिन में रहने वाली एक पुस्तक संपादक लीला डे की है। न्यूयॉर्क में बड़ी मेहनत से संवारा गया उसका जीवन, भारत में रह रही उसकी माँ के एक फोन कॉल से पूरी तरह बदल जाता है। पेशेवर सफलता की दहलीज पर खड़ी लीला को पता चलता है कि उसे कोलकाता में अपने परिवार की विशाल, जीर्ण-शीर्ण संपत्ति विरासत में मिली है – वही पारिवारिक विरासत जिसे उसने 16 वर्ष पहले दृढ़ता से छोड़ दिया था।
मूल रूप से भारत की रहने वाली और अब लॉस एंजिल्स में बसी रॉय ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि यह पुस्तक न केवल पाठकों को प्रेरित करेगी, बल्कि एक विशिष्ट बंगाली संस्कृति के संदर्भ में पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाले मानसिक आघात की सच्चाई को सामने लाएगी।’’
भाषा
देवेंद्र दिलीप
दिलीप