(EPFO News Update/ Image Credit: IBC24 News)
नई दिल्ली: EPFO News Update: नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रोविडेंड फंड यानी PF उनकी भविष्य की बचत (EPFO News Update) का अहम हिस्सा है। सैलरी से होने वाली कटौती और कंपनी के योगदान को लेकर कर्मचारियों के मन में अक्सर कई सवाल उठते रहते हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने ऐसे ही कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए हैं। इसमें खास तौर पर PF योगदान और कर्मचारी की सैलरी से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया गया है।
कई कर्मचारियों को चिंता रहती है कि कंपनी को अपनी तरफ से PF में योगदान देना पड़ता है, इसलिए वह उनकी सैलरी कम कर सकती है या नहीं। EPFO के अनुसार, कंपनी PF योगदान का खर्च निकालने के लिए कर्मचारी की तय सैलरी या वेतन में कटौती नहीं कर सकती। EPF और MP Act, 1952 की धारा 12 के तहत नियोक्ता को इस तरह की कटौती से रोका गया है। यानी PF में कंपनी का हिस्सा जमा करने के नाम पर तय वेतन घटाना नियमों के खिलाफ है।
EPFO के नियमों के अनुसार कर्मचारी अपनी इच्छा से 12 फीसदी की वैधानिक सीमा से अधिक रकम PF में जमा कर सकता है। इसे Voluntary Provident Fund यानी VPF कहा जाता है। इससे कर्मचारी रिटायरमेंट के लिए अतिरिक्त बचत कर सकता है। लेकिन कर्मचारी के अतिरिक्त योगदान के साथ कंपनी के लिए भी उतनी ही रकम देना जरूरी नहीं है। नियोक्ता अपना योगदान निर्धारित सीमा तक ही रख सकता है।
PF से जुड़ा एक और बड़ा अपडेट (EPFO News Update) वेतन सीमा को लेकर है। केंद्र सरकार ने EPFO के अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि ज्यादा वेतन पाने वाले कई कर्मचारी अब अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ सकते हैं। इससे सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ेगा।
सरकार के इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों के EPFO के दायरे में आने की (EPFO News Update) बात कही गई है। इसके बाद पात्र कर्मचारियों को PF के साथ कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा (EDLI) जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। इससे रिटायरमेंट बचत और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी।