(EPFO Pension/ Image Credit: Moneycontrol)
नई दिल्ली: EPFO Pension News: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए हर महीने मिलने वाली सैलरी भले ही राहत देती हो लेकिन रिटायरमेंट का विचार आते ही आर्थिक सुरक्षा की चिंता बढ़ जाती है। सरकारी नौकरी की तरह यहां तय पेंशन की सुविधा नहीं होती, इसलिए बुढ़ापे के लिए स्थिर आमदनी को लेकर डर बना रहता है। ऐसे में जिन कर्मचारियों की सैलरी से PF कटता है। उनके लिए EPFO की EPS स्कीम एक मजबूत सहारा साबित होती है जो रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन देती है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के तहत हर महीने सैलरी से PF की कटौती होती है। इसमें कर्मचारी का योगदान EPF खाते में जमा होता है। जबकि कंपनी के योगदान का एक हिस्सा सीधे EPS यानी एम्प्लॉई पेंशन स्कीम में जाता है। यही EPS फंड भविष्य में रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन का आधार बनता है। इस स्कीम का लाभ प्राप्त करने के लिए कर्मचारी कम से कम 10 साल तक पेंशन योग्य सेवा पूरी करनी होती है और पूरी पेंशन का लाभ 58 वर्ष की उम्र के बाद मिलता है।
EPFO ने पेंशन की गणना के लिए एक आसान और पारदर्शी फॉर्मूला दिया है। जिससे कोई भी कर्मचारी खुद अपनी पेंशन निकाल सकता है। यह फॉर्मूला है- (पेंशन योग्य सैलरी × नौकरी के कुल वर्ष) ÷ 70। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पेंशन योग्य सैलरी की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये प्रति माह तय की गई है। इसका मतलब यह है कि भले ही किसी कर्मचारी की वास्तविक सैलरी अधिक हो। लेकिन पेंशन की गणना इसी सीमा के आधार पर की जाएगी। नौकरी के वर्षों के आधार पर अंतिम पेंशन तय होती है।
अगर कोई कर्मचारी 50 साल तक नौकरी करने के बाद रिटायर होता है और उसकी पेंशन योग्य सैलरी 15,000 रुपये मानी जाती है तो पेंशन का हिसाब कुछ इस तरह होगा- (15,000 × 50) ÷ 70। इस गणना के अनुसार उसे लगभग 10,714 रुपये प्रति माह पेंशन मिलेगी। यह रकम रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का स्रोत बनती है और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।
EPFO के नियमों के मुताबिक अगर कोई कर्मचारी 58 वर्ष की उम्र से पहले पेंशन लेना शुरू करता है तो उसे हर साल 4% की दर से कटौती का सामना करना पड़ता है। इसका सीधा असर उसकी मासिक पेंशन पर पड़ता है। इसलिए बेहतर यही माना जाता है कि कर्मचारी निर्धारित उम्र तक इंतजार करें ताकि उन्हें पूरी पेंशन का लाभ मिल सके और रिटायरमेंट के बाद आर्थिक स्थिरता बनी रहे।