भारत-ब्रिटेन एफटीए का लाभ उठाने के लिए निर्यातकों को मानक उन्नत करने की जरूरत: विशेषज्ञ

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भारत-ब्रिटेन एफटीए का लाभ उठाने के लिए निर्यातकों को मानक उन्नत करने की जरूरत: विशेषज्ञ

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  • Publish Date - June 21, 2026 / 02:19 PM IST,
    Updated On - June 21, 2026 / 02:19 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जून (भाषा) भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का पूरा लाभ उठाने के लिए भारतीय निर्यातकों को अपने उत्पादों के मानकों को उन्नत करना होगा और ब्रिटेन के नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप अपने उत्पादों को ढालना होगा। यह समझौता 15 जुलाई से प्रभावी होगा। यह राय विशेषज्ञों ने व्यक्त की है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि सरकार को देश के विभिन्न हिस्सों में जागरूकता अभियान चलाकर घरेलू उद्योग को भारत-ब्रिटेन के बीच हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के बारे में जानकारी देनी चाहिए।

ब्रिटेन के व्यापार एवं उद्योग विभाग ने इस सप्ताह छह शहरों में देशव्यापी मुक्त व्यापार समझौता जागरूकता अभियान शुरू किया है, ताकि ब्रिटेन की कंपनियों को इस समझौते के लागू होने के लिए तैयार किया जा सके।

विधि कंपनी एसएएम एंड कंपनी के भागीदार रुद्र कुमार पांडेय ने कहा कि भारत में भी इसी तरह के प्रयास की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि देशभर के विनिर्माण केंद्रों में सीईटीए आधारित निर्यात-तैयारी कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए, ताकि कारोबारी क्षेत्र इस समझौते की संभावनाओं को वास्तविक व्यापारिक अवसरों में बदल सकें।

उन्होंने कहा कि भारतीय निर्यातकों को उत्पाद मानकों में सुधार कर ब्रिटेन के नियामकीय ढांचे के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा, ताकि वे केवल एक बार के आपूर्तिकर्ता न रहकर भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला भागीदार बन सकें।

पांडेय ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) का शीघ्र अंतिम रूप दिया जाना भी निवेशकों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे पूंजी-गहन और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन एफटीए से होने वाले संभावित लाभ केवल व्यापार सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लंबे समय में आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकीकरण तक विस्तृत हैं, जिसके लिए प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक होगा।

डेलॉयट इंडिया के भागीदार गुलजार डिडवानिया ने कहा कि यह समझौता निवेशकों के लिए उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन, वित्त प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और उच्च मूल्य सेवाओं में द्विपक्षीय पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देगा।

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के लिए भारत एक बड़े बाजार, मजबूत विनिर्माण क्षमता और विकसित हो रही नियामकीय व्यवस्था का अवसर प्रदान करता है, जबकि भारत के लिए ब्रिटेन यूरोपीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच, उन्नत प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास का द्वार है।

डिडवानिया ने कहा कि शुल्क कटौती से भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धी क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

उन्होंने बताया कि समझौते के तहत कपड़े एवं परिधान पर ब्रिटेन के 12 प्रतिशत तक, चमड़ा एवं फुटवियर पर 16 प्रतिशत तक, इंजीनियरिंग वस्तुओं एवं वाहनों के कलपुर्जे पर 18 प्रतिशत तक तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर 70 प्रतिशत तक शुल्क समाप्त कर दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि इससे भारतीय चमड़ा एवं फुटवियर निर्यात तीन वर्षों में लगभग दोगुना होकर 49.4 करोड़ डॉलर से एक अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि भारत का वस्त्र क्षेत्र ब्रिटेन के बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।

भाषा योगेश अजय

अजय