पटना, 27 अप्रैल (भाषा) बिहार सरकार ने राज्य में नियोजित शहरीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 11 नये सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का निर्णय लिया है।
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सोमवार को कहा कि इस योजना के तहत किसानों और भूमि मालिकों को भागीदार बनाया जाएगा तथा कोई भी भूमिहीन नहीं होगा। प्रस्तावित 11 सैटलाइट टाउनशिप का विकास टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस) के तहत भूमि-पूलिंग व्यवस्था के आधार पर किया जाएगा।
सूचना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रधान सचिव ने कहा कि राज्य सरकार ने बिहार टाउन प्लानिंग स्कीम नियमावली, 2025 के तहत इन टाउनशिप के विकास का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आधारभूत संरचना निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि मालिकों को सशक्त बनाने का माध्यम भी है।
उन्होंने बताया कि योजना क्षेत्र की प्रत्येक भूमि को चौड़ी सड़क, बिजली, ड्रेनेज और सीवर जैसी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। बिखरे और अनियमित भूखंडों को व्यवस्थित कर उनकी उपयोगिता और बाजार मूल्य बढ़ाया जाएगा। नियमित आकार के भूखंड मिलने से निर्माण कार्य भी आसान होगा।
प्रधान सचिव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य भूमि मालिकों को विकसित भूमि का अधिकतम हिस्सा वापस देना है। इसके तहत 55 प्रतिशत विकसित भूमि वापस दी जाएगी, जबकि 22 प्रतिशत भूमि सड़क और बुनियादी ढांचे के निर्माण, पांच प्रतिशत भूमि पार्क, हरियाली और सार्वजनिक सुविधाओं तथा तीन प्रतिशत भूमि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आवास के लिए उपयोग में लाई जाएगी। शेष 15 प्रतिशत भूमि विकास लागत की भरपाई के लिए रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि विकास के बाद भूमि के बाजार मूल्य में कई गुना वृद्धि होती है, जिससे भूमि मालिकों के आर्थिक हित सुरक्षित रहते हैं। जो लोग किसी कारणवश शहर नियोजन योजना का हिस्सा नहीं बनना चाहते, उन्हें आपसी सहमति के आधार पर मुआवजा, टीडीआर (विकास अधिकार) अथवा विकसित भवन में हिस्सेदारी का विकल्प दिया जाएगा।
विनय कुमार ने कहा कि प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों में भूमि खरीद-बिक्री पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध किसानों और भूमि मालिकों के हितों की रक्षा के लिए है, ताकि बिचौलिये कम कीमत पर जमीन न खरीद सकें। योजना पूरी होने और आधारभूत संरचना तैयार होने के बाद भूमि मालिक अपनी संपत्ति को बेहतर मूल्य पर बेचने या विकसित करने के हकदार होंगे।
उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और मसौदा योजना से लेकर भूखंडों के पुनर्गठन तक प्रत्येक चरण में भूमि मालिकों तथा आम जनता से परामर्श लिया जाएगा।
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रंजन रमण
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