Mahanadi Water Crisis: पल-पल मरती ‘धार’, नदियों की गुहार! करोड़ों खर्च के बाद भी ‘रेगिस्तान’ में तब्दील हो रही CG की जीवनदायिनी नदियां, पानी के लिए तरस रहे कई गांव

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Mahanadi Water Crisis: पल-पल मरती ‘धार’, नदियों की गुहार! छत्तीसगढ़ में बढ़ती भीषण गर्मी के बीच अब सबसे चिंताजनक खबर प्रदेश की जीवनदायिनी महानदी से सामने आ रही है।

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 11:02 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 11:02 PM IST

chhattisgarh nadiyan/ image source: ibc24

HIGHLIGHTS
  • महानदी में गंभीर जल संकट
  • 33 मीटर तक गिरा भूजल
  • सैकड़ों हैंडपंप हुए सूखे

Mahanadi Water Crisis: पल-पल मरती ‘धार’, नदियों की गुहार! छत्तीसगढ़ में बढ़ती भीषण गर्मी के बीच अब सबसे चिंताजनक खबर प्रदेश की जीवनदायिनी महानदी से सामने आ रही है। जो महानदी कभी अपने उफान से लोगों को डराती थी, आज वही खुद पानी के लिए तरसती नजर आ रही है। रायगढ़ और सारंगढ़ जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली यह नदी अब रेगिस्तान में तब्दील हो चुकी है। हालात इतने भयावह हैं कि जिले का भूजल स्तर 33 मीटर तक नीचे गिर गया है और सैकड़ों हैंडपंप पानी की जगह हवा उगल रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर इस स्थिति के पीछे सिर्फ कुदरती आपदा जिम्मेदार है या फिर नदी पर बने बैराजों की भूमिका भी इसमें शामिल है।

Mahanadi water crisis: सैकड़ों हैंडपंप हुए सूखे

प्रचंड गर्मी और तपते सूरज ने महानदी के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। जहां पहले सालभर पानी लबालब भरा रहता था, वहां अब रेत के ऊंचे टीले और सूखा पड़ा नजर आ रहा है। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुल 271 हैंडपंप पूरी तरह ‘डेड’ हो चुके हैं, जबकि 854 हैंडपंप हवा उगल रहे हैं। खरसिया क्षेत्र में 282 हैंडपंप सूख चुके हैं, रायगढ़ में 147 और पुसौर में 132 हैंडपंप प्रभावित हैं। पुसौर ब्लॉक को ‘सेमी क्रिटिकल जोन’ घोषित कर दिया गया है। शहरों में पानी को लेकर भले कागजी पाबंदियां हों, लेकिन नदी किनारे बसे गांवों की हालत बेहद चिंताजनक है।

Chhattisgarh drought news: महानदी में गंभीर जल संकट

महानदी के तट पर बसे नदीगांव, लिप्ति, सूरजगढ़ और परसरामपुर जैसे गांवों में पानी के लिए संघर्ष चरम पर है। जहां 15 साल पहले 50 फीट पर पानी मिल जाता था, आज 400 फीट नीचे भी बोरवेल फेल हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी पर बने बैराज, खासकर कलमा बैराज में पानी रोकने से यह संकट और गहरा गया है। जब बैराज के गेट खोले भी जाते हैं, तो पानी गांवों तक पहुंचने से पहले ही रेत में समा जाता है। पानी की किल्लत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में पंचायत ने पानी भरने के लिए पारी तय कर दी है-कोई सुबह तो कोई शाम। लेकिन बोरवेल का पानी इतना खारा है कि उससे न दाल पकती है और न चाय का स्वाद आता है। मजबूरी में ग्रामीण नदी किनारे रेत खोदकर गंदा और मटमैला पानी छानकर पीने को मजबूर हैं।

groundwater depletion India: 33 मीटर तक गिरा भूजल

गांवों में जल संकट की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। पड़िगांव में 26 में से सिर्फ 3 बोर चालू हैं, ठाकुरपाली में 4 में से केवल 1 बोर में पानी बचा है, जबकि नदीगांव में पूरे गांव की निर्भरता सिर्फ 2 सरकारी बोर पर है। घरों के नल सूख चुके हैं और लोगों में भारी आक्रोश है। यह स्थिति सिर्फ एक मौसम की मार नहीं, बल्कि जल प्रबंधन और संरक्षण की विफलता का परिणाम भी मानी जा रही है। यदि समय रहते बैराजों से पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया और भूजल स्तर सुधारने के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह सूखा संकट और गहरा सकता है और कई गांवों के अस्तित्व पर खतरा बन सकता है।

महानदी में संकट क्यों बढ़ा?

महानदी में गंभीर जल संकट

भूजल स्तर कितना गिरा है?

33 मीटर तक गिरा भूजल

कितने हैंडपंप बंद हैं?

सैकड़ों हैंडपंप हुए सूखे