एफडीआई में रियायत चीनी कंपनियों के लिए नहीं, चीन की कम हिस्सेदारी वाली इकाइयों को लाभ

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एफडीआई में रियायत चीनी कंपनियों के लिए नहीं, चीन की कम हिस्सेदारी वाली इकाइयों को लाभ

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 06:54 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 06:54 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) विदेशी कंपनियों में चीन की अगर 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी है, वे भारत में स्वतः मार्ग से सभी क्षेत्रों में निवेश करने के लिए पात्र होंगी। हालांकि, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले चीन/हांगकांग या अन्य देशों में पंजीकृत इकाइयों पर सरल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नियम लागू नहीं होंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह कहा।

पहले, भूमि सीमा साझा करने वाले सीमावर्ती देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को, यहां तक ​​कि एक भी शेयर रखने पर भी, भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए अनिवार्य मंजूरी लेनी पड़ती थी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को इस संबंध में प्रेस नोट-3, 2020 में संशोधन किया। इस प्रेस नोट के अनुसार, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के निवेशकों को किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए अनिवार्य मंजूरी लेनी होगी।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ भूमि सीमा साझा (एलबीसी) करने वाले देशों के निवेशकों पर लागू सभी प्रतिबंध अभी भी लागू हैं। भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में स्थित इकाइयों या निवेशकों के लिए कोई छूट नहीं है। यह छूट केवल गैर-एलबीसी इकाइयों के लिए है जिनमें भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में 10 प्रतिशत से कम लाभकारी स्वामित्व हैं और जिनकी गैर-नियंत्रणकारी हिस्सेदारी है…। इसलिए भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश के संबंध में कोई छूट नहीं है।’’

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले किसी देश की कोई कंपनी प्रौद्योगिकी प्रदान करती है और उसमें एक प्रतिशत तक की हिस्सेदारी रखती है, जिसके माध्यम से वह किसी प्रकार का नियंत्रण कर सकती है, तो भी निवेश के लिए सरकारी मार्ग से मंजूरी की आवश्यकता होगी।

संशोधित प्रेस नोट के अनुसार, 10 प्रतिशत तक के गैर-नियंत्रणकारी भूमि सीमा साझा करने वाले लाभकारी स्वामित्व वाले निवेशकों को लागू क्षेत्रीय सीमाओं, प्रवेश मार्गों और अन्य शर्तों के अनुसार स्वत: मार्ग के तहत अनुमति दी जाएगी।

ऐसा निवेश केवल निवेश प्राप्त करने वाली इकाई द्वारा डीपीआईआईटी को केवल संबंधित जानकारी या विवरण देने पर निर्भर करेगा।

हालांकि, सरकार ने भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले चीन समेत अन्य देशों की कंपनियों के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्तावों को तेजी से मंजूरी देने की घोषणा की है।

पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों, पॉलीसिलिकॉन और इनगॉट-वेफर, अत्याधुनिक बैटरी उपकरणों, दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक और दुर्लभ खनिज प्रसंस्करण में विनिर्माण की निर्दिष्ट क्षेत्रों और गतिविधियों में भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश के प्रस्तावों पर 60 दिन के भीतर कदम उठाने के साथ निर्णय लिया जाएगा।

डीपीआईआईटी सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति इस सूची को बढ़ा या घटा सकती है।

वर्तमान में, प्रेस नोट-3 के अंतर्गत लगभग 600 आवेदन लंबित हैं।

इन आवेदनों के बारे में पूछे जाने पर सचिव ने कहा कि इनमें से कई आवेदन दो श्रेणियों में से किसी एक…10 प्रतिशत की सीमा से नीचे और त्वरित प्रक्रिया के अंतर्गत… आएंगे।

दस प्रतिशत से नीचे की सीमा के अंतर्गत आने वाले आवेदन अधिसूचना जारी होने के बाद निवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं और बाद में आवश्यक जानकारी जमा कर सकते हैं, जबकि त्वरित प्रक्रिया के अंतर्गत आने वाले अपने आवेदन दोबारा जमा कर सकते हैं।

भाटिया ने कहा कि त्वरित मंजूरी के लिए एक विशिष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है ताकि 60 दिन की समयसीमा का पालन सुनिश्चित किया जा सके, क्योंकि इससे संभावित निवेशकों को निश्चितता मिलेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘अब हम उन लोगों के लिए गैर-पीएन-3 मार्ग प्रदान कर रहे हैं जो स्वामित्व और नियंत्रण की सीमा से नीचे हैं…। यदि भूमि सीमा साझा करने वाले देशों की कोई कंपनी भारत में निवेश करना चाहती है, तो उस स्थिति में पीएन-3 मार्ग लागू होगा।’’

सचिव ने कहा कि लाभकारी स्वामित्व का विचार उन कंपनियों के लिए प्रासंगिक है जो भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के बाहर स्थित हैं।

उन्होंने कहा कि ब्लैक रॉक जैसी कंपनियां प्रेस नोट में ढील देने की मांग कर रही थी। त्वरित प्रक्रिया का लाभ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के बाहर की कंपनियां भी उठा सकती हैं।

सचिव ने कहा, ‘‘त्वरित प्रक्रिया में कुछ चरण हटा दिए गए हैं…लेकिन मोटे तौर पर, जहां तक ​​सुरक्षा मंजूरी और राजनीतिक मंजूरी की बात है, वह प्रक्रिया बनी रहेगी।’’

उन्होंने बताया कि एक पोर्टल तैयार किया जा रहा है ताकि आवेदक जानकारी दर्ज कर अपने निवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकें।

विशिष्ट क्षेत्र जैसे अन्य मामलों के लिए पोर्टल में एक अलग प्रावधान बनाया जा रहा है ताकि उन्हें 60 दिन के भीतर मंजूरी मिल सके।

विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान के लिए अपनाए गए मानदंडों के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, ‘‘इन क्षेत्रों में हमने पाया कि हमें भारत में विनिर्माण बढ़ाने की आवश्यकता है।’’

भाटिया ने कहा, ‘‘हमें भारत में विनिर्माण को गति देने आवश्यकता है। चाहे वह सिलाई मशीन हो, या सौर सेल असेंबल करने वाली इंडस्ट्री 4.0 से जुड़ी मशीनें हों, या स्विचगियर आदि। इसलिए, ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हमें साझेदारी और संयुक्त उद्यमों की व्यापक संभावनाएं दिखाई देती हैं…।

इसीलिए क्षेत्रों को जोड़ने या घटाने को लेकर लचीलापन रखा गया है।

मंत्रिमंडल से मंजूर बदलावों को डीपीआईआईटी और आर्थिक मामलों के विभाग अधिसूचित करेंगे। इसके बाद, यह लागू हो जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास करेंगे।’’

भाषा रमण अजय

अजय