आरबीआई ने जमा स्वीकार नहीं करने वाली छोटी एनबीएफसी को पंजीकरण की अनिवार्यता से दी छूट

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आरबीआई ने जमा स्वीकार नहीं करने वाली छोटी एनबीएफसी को पंजीकरण की अनिवार्यता से दी छूट

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  • Publish Date - April 29, 2026 / 10:15 PM IST,
    Updated On - April 29, 2026 / 10:15 PM IST

मुंबई, 29 अप्रैल (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को कहा कि 1,000 करोड़ रुपये से कम संपत्ति तथा लोगों से जमा स्वीकार नहीं करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) एक जुलाई से पंजीकरण और अनिवार्य आरक्षित कोष से जुड़ी आवश्यकताओं से छूट के लिए पात्र होंगी।

केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में एक परिपत्र जारी कर ऐसी एनबीएफसी के लिए अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को आसान बनाने की बात कही है।

आरबीआई ने कहा, “जो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) जमा स्वीकार नहीं करती हैं, सार्वजनिक कोष प्राप्त नहीं करती हैं और जिनका किसी प्रकार का ग्राहक संपर्क नहीं है और जिनके नवीनतम लेखा-परीक्षित बहिखाते के अनुसार संपत्ति 1,000 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45आईए और 45आईसी के प्रावधानों से एक जुलाई 2026 से छूट दी जाएगी।”

ऐसी मौजूदा एनबीएफसी, जिनके पास टाइप-1 एनबीएफसी के रूप में पंजीकरण प्रमाणपत्र है और जो निर्धारित शर्तों को पूरा करती हैं, वे 31 दिसंबर 2026 तक भारतीय रिजर्व बैंक से अपना पंजीकरण रद्द कराने के लिए आवेदन कर सकती हैं।

आरबीआई अधिनियम की धारा 45आईए पंजीकरण की अनिवार्यता से संबंधित है, जबकि धारा 45आईसी के तहत एनबीएफसी को एक आरक्षित कोष बनाना होता है और हर वर्ष अपने शुद्ध लाभ का 20 प्रतिशत उसमें जमा करना होता है।

अब तक ये एनबीएफसी आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45आईए के तहत पंजीकरण के लिए बाध्य थीं।

भारतीय रिजर्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां – पंजीकरण, छूट और पैमाने आधारित विनियमन के लिए ढांचा) संशोधन निर्देश, 2026, एक जुलाई, 2026 से प्रभावी होंगे।

आरबीआई ने कहा, “1,000 करोड़ रुपये की संपत्ति सीमा को प्रणालीगत महत्व का स्तर माना गया है, जिसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक की निगरानी आवश्यक है।”

भाषा योगेश रमण

रमण