(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 23 जनवरी (भाषा) संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि 2025 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह 73 प्रतिशत बढ़कर 47 अरब डॉलर हो गया। यह वृद्धि मुख्य रूप से सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश के कारण हुई। इसे देश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने के लिए बनाई गई नीतियों का समर्थन मिला।
व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (अंकटाड) द्वारा बृहस्पतिवार को जारी ‘वैश्विक निवेश रुझान निगरानी’ में कहा गया कि चीन में एफडीआई प्रवाह लगातार तीसरे वर्ष गिरा और समीक्षाधीन अवधि में आठ प्रतिशत की गिरावट के साथ अनुमानित 107.5 अरब डॉलर रह गया।
अंकटाड ने कहा, ”भारत में एफडीआई प्रवाह 73 प्रतिशत बढ़कर 47 अरब डॉलर हो गया, जिसका मुख्य कारण वित्त, आईटी और आरएंडडी (अनुसंधान एवं विकास) सहित सेवाओं और विनिर्माण में बड़े निवेश थे। इन्हें भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने के लिए बनाई गई नीतियों का समर्थन मिला।”
इसमें आगे कहा गया कि 2025 में वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अनुमानित 1600 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 14 प्रतिशत की वृद्धि है। हालांकि, इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा कई प्रमुख वैश्विक वित्तीय केंद्रों और निवेश केंद्रों (महत्वपूर्ण एफडीआई प्रवाह वाली अर्थव्यवस्थाओं) के जरिये उच्च प्रवाह के कारण था। इसने 140 अरब डॉलर से अधिक का योगदान दिया।
उत्तरी अमेरिका में एफडीआई प्रवाह व्यापक रूप से स्थिर रहा। दुनिया के सबसे बड़े एफडीआई प्राप्तकर्ता अमेरिका ने दो प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। सीमा पार विलय और अधिग्रहण (एमएंडए) गतिविधि 22 प्रतिशत घटकर 132 अरब डॉलर रह गई।
भाषा पाण्डेय रमण
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