यूपीआई पर एमडीआर से नकद लेनदेन बढ़ने की आशंका सच नहीं होगीः आरबीआई डिप्टी गवर्नर
यूपीआई पर एमडीआर से नकद लेनदेन बढ़ने की आशंका सच नहीं होगीः आरबीआई डिप्टी गवर्नर
मुंबई, 18 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होने से नकद लेनदेन बढ़ने की आशंका के सच साबित होने की संभावना नहीं है।
सरकार के मुताबिक, 15 अक्टूबर से व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर देना होगा। हालांकि, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगा। दो व्यक्तियों के बीच भुगतान और रोजमर्रा के अधिकांश कारोबारी भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।
एमडीआर लागू होने के बाद नकदी लेनदेन बढ़ने की आशंकाओं के बारे में पूछे जाने पर मुर्मू ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह आशंका सच होगी। यह केवल शुरुआती आशंका है।’’
उन्होंने कहा कि एमडीआर के जरिये लागत की वसूली के तरीके में बड़ा बदलाव हो रहा है और इसी वजह से ऐसी आशंका पैदा हुई है।
यहां बीसीसी एंड आई द्वारा आयोजित एक वित्तीय बाजार सम्मेलन में मुर्मू ने कहा कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ नकदी का प्रचलन भी बढ़ना विरोधाभासी नहीं है, क्योंकि नकदी का इस्तेमाल लेनदेन के साधन के साथ मूल्य को सुरक्षित रखने के लिए भी होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ नकदी के प्रचलन में उसी अनुपात में कमी आने की अपेक्षा आंकड़ों से पुष्ट नहीं होती, क्योंकि दोनों चीजें एक साथ हो रही हैं।’’
मुर्मू ने कहा, ‘‘हम नकदी के प्रचलन, खासकर चलन में मौजूद नोटों पर नजर रख रहे हैं कि डिजिटल लेनदेन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उस पर इसका क्या असर पड़ रहा है।’’
बैंकों और वित्तीय संस्थानों में कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि मशीनें मानवीय निर्णय लेने की जगह लें या उनका सहयोग करें, जवाबदेही निदेशक मंडलों की ही रहेगी।
उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थानों में मानवीय मेधा से मशीनी मेधा की ओर बढ़ने के साथ निदेशक मंडलों को इसके लिए खुद को तैयार करना होगा।
आरबीआई की ओर से किए गए नियामकीय बदलावों पर मुर्मू ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने पिछले एक साल में 600 से अधिक मसौदा और अंतिम संशोधन परिपत्र जारी किए हैं।
उन्होंने कहा कि आरबीआई ने अपने नियमन के दायरे में आने वाली संस्थाओं को करीब 11 श्रेणियों में पुनर्गठित किया है और कुछ परिपत्र इनमें से कई श्रेणियों पर लागू होते हैं।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

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