आत्मनिर्भरता का मतलब अपनी सीमाओं के भीतर सब कुछ बनाना नहीं : विदेश सचिव

आत्मनिर्भरता का मतलब अपनी सीमाओं के भीतर सब कुछ बनाना नहीं : विदेश सचिव

आत्मनिर्भरता का मतलब अपनी सीमाओं के भीतर सब कुछ बनाना नहीं : विदेश सचिव
Modified Date: September 18, 2026 / 05:56 pm IST
Published Date: September 18, 2026 5:56 pm IST

नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) भारत के आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य अपनी सीमाओं के भीतर हर चीज का निर्माण करना नहीं है, बल्कि अपनी क्षमताओं को समझना एवं भरोसेमंद साझेदारों के साथ देश की महत्वपूर्ण क्षमताओं को विकसित करना है।

‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि भारत जब अपना प्रौद्योगिकी परिवेश विकसित करने की दिशा में बढ़ रहा है तो उसका उद्देश्य इस उद्योग में प्रभुत्व के लिए प्रतिस्पर्धा करना नहीं, बल्कि कंपनियों के साथ साझेदारी करना और दुनिया के लिए खुले रहना है।

उन्होंने कहा, ‘‘आत्मनिर्भरता का मतलब अपनी सीमाओं के भीतर सब कुछ बनाना नहीं है। दुनिया का कोई भी देश ऐसा नहीं करता। किसी देश को ऐसा करने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से लागत बढ़ेगी, नवाचार की गति धीमी होगी और औद्योगिक विकास की प्रक्रिया अधिक अलग-थलग हो जाएगी।’’

सरकार आत्मनिर्भर बनने और खासकर प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई नीतियां ला रही है।

मिस्री ने कहा, ‘‘सही अर्थों में आत्मनिर्भरता का मतलब यह समझना है कि हमारी क्षमताएं एवं सामर्थ्य किन क्षेत्रों में हमारे अपने नियंत्रण में होनी चाहिए और उन्हें अनुशासन के साथ विकसित करना है। वहीं, जहां कोई भरोसेमंद साझेदारी हमारे लिए बेहतर हो, वहां उसे सहजता के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि भारत डिजाइन, पैकेजिंग और विनिर्माण के कुछ खास चरणों में अपनी घरेलू क्षमता को मजबूत कर रहा है। साथ ही, दुनिया के प्रमुख उपकरण निर्माताओं, सामग्री विकसित करने वाली कंपनियों और डिजाइन कंपनियों को भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए आमंत्रित कर रहा है।

‘भारतीय सेमीकॉन मिशन 1.0’ के तहत सरकार ने 12 सेमीकंडक्टर संयंत्रों को मंजूरी दी थी, जिनमें से तीन इकाइयों ने उत्पादन शुरू कर दिया है।

सरकार ने ‘सेमीकॉन 2.0’ भी शुरू किया है, जिसका मुख्य जोर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में डिजाइन एवं बौद्धिक संपदा तैयार करने के साथ-साथ विनिर्माण इकाइयों को आकर्षित करने पर है।

‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि सरकार इस क्षेत्र के लिए अगली योजना पर पहले ही काम शुरू कर चुकी है।

मिस्री ने कहा, ‘‘हम अब भी आयातित उपकरणों और आयातित सामग्रियों पर निर्भर हैं। हमें विभिन्न नियामकीय व्यवस्थाओं में काम करने की क्षमता विकसित करनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें निरंतरता बनाए रखनी होगी। नीति वर्षों तक स्थिर रहनी चाहिए, केवल एक मौसम के लिए उसका प्रदर्शन नहीं किया जाना चाहिए। भरोसा उत्साह से नहीं, बल्कि सटीक और भरोसेमंद अपेक्षाओं से बनता है।’’

उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग में किसी भी गठजोड़ या सहयोग के दौरान उद्योग जगत से दोहराव के बजाय एक-दूसरे की क्षमताओं के पूरक बनने पर ध्यान देने को कहा।

मिस्री ने कहा, ‘‘थोड़ी अधिक लागत के बावजूद एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार अक्सर आज के सबसे सस्ते विकल्प से बेहतर होता है। जहां किसी संयंत्र को तैयार करने में वर्षों लग सकते हैं और निवेश की भरपाई में दशकों लग सकते हैं, वहां भरोसे के साथ योजना बनाने की क्षमता अपने आप में महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा कि सबसे मजबूत औद्योगिक साझेदारियां, जो मुश्किल साल या सरकार में बदलाव के दौर में भी कायम रहती हैं, वर्षों पहले संयुक्त अनुसंधान, साझा प्रशिक्षण और पहले साथ काम कर चुके लोगों के जरिये तैयार होती हैं।

विदेश सचिव ने कहा, ‘‘एक बार अर्जित किया गया भरोसा किसी कंपनी की सबसे टिकाऊ परिसंपत्तियों में से एक होता है। इसी भावना के साथ भारत की महत्वाकांक्षा इस उद्योग में प्रभुत्व के लिए प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। हमारा उद्देश्य साझेदार बनना और उन कंपनियों के साथ सक्रिय रूप से साझेदारी करना है, जो भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती हैं। भारत अपनी कमियों के बारे में भरोसेमंद और ईमानदार रहते हुए दुनिया के लिए पूरी तरह खुला है।’’

उन्होंने कहा कि भरोसा केवल नीतिगत दस्तावेजों के जरिये नहीं बनता बल्कि हाथ मिलाने, बातचीत करने और ‘सेमीकॉन इंडिया’ जैसे आयोजनों के जरिये भी बनता है।

भाषा निहारिका पाण्डेय

पाण्डेय


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