नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगी। बैठक में बैंकों की ओर से विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के लिए चलाए जा रहे अभियान की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्री 13 जुलाई को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और आईडीबीआई बैंक समेत वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ बैठक की अध्यक्षता करेंगी। इसमें विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) जमा (एफसीएनआर-बी), विदेशी मुद्रा बांड और बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) जुटाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले महीने प्रवासी भारतीयों (एनआरआई), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) और भारतीय मूल के लोगों (पीआईओ) से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए तीन से पांच साल की अवधि वाली नई एफसीएनआर (बी) जमाओं पर ब्याज दर सीमा को 30 सितंबर तक हटा दिया था।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब एफसीएनआर (बी) जमा में प्रवाह में तेज गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2025-16 में इसका शुद्ध प्रवाह घटकर केवल 94.6 करोड़ डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 7.1 अरब डॉलर था।
नई व्यवस्था के तहत आरबीआई तीन से पांच साल की अवधि वाली एफसीएनआर (बी) जमाओं के लिए बैंकों को रियायती विदेशी मुद्रा विनिमय सुविधा उपलब्ध करा रहा है। इससे बैंकों की विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव की लागत में काफी कमी आएगी।
इसके अलावा, आरबीआई ने 30 सितंबर, 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) जुटाने के लिए भी रियायती विदेशी मुद्रा विनिमय सुविधा देने की घोषणा की है।
केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (सीपीएसई) आमतौर पर ईसीबी के जरिये हर साल करीब 10 से 12 अरब डॉलर जुटाते हैं। मौजूदा अवसर और करीब तीन प्रतिशत लागत लाभ को देखते हुए कई कंपनियों द्वारा अपनी उधारी योजनाओं को पहले ही पूरा करने की उम्मीद है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को ईसीबी जारी करने के लिए प्रोत्साहित करने वाली रियायती विदेशी मुद्रा विनिमय सुविधा से विदेशी बाजारों से उधारी बढ़ सकती है। इससे कंपनियों को प्रतिस्पर्धी दरों पर धन जुटाने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट में कहा गया कि इससे बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (एफसीसीबी) के कुल प्रवाह में आई गिरावट को पलटने में मदद मिल सकती है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह प्रवाह करीब 30 प्रतिशत घटकर 42.9 अरब डॉलर रह गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 61.2 अरब डॉलर था।
सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्री बैठक में बैंकों से अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाने का आग्रह भी कर सकती हैं।
भाषा योगेश रमण
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