आंतरिक ओम्बड्समैन तक शिकायत की पहुंच सुनिश्चित करें वित्तीय संस्थानः आरबीआई डिप्टी गवर्नर

आंतरिक ओम्बड्समैन तक शिकायत की पहुंच सुनिश्चित करें वित्तीय संस्थानः आरबीआई डिप्टी गवर्नर

आंतरिक ओम्बड्समैन तक शिकायत की पहुंच सुनिश्चित करें वित्तीय संस्थानः आरबीआई डिप्टी गवर्नर
Modified Date: July 20, 2026 / 09:41 pm IST
Published Date: July 20, 2026 9:41 pm IST

मुंबई, 20 जुलाई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे. ने सभी विनियमित संस्थाओं को अपनी आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली की व्यापक समीक्षा करने और ऐसी व्यवस्था बनाने को कहा है जिससे कोई भी शिकायत गलती से आंतरिक ओम्बड्समैन तक पहुंचे बगैर बीच में ही न रुक जाए।

स्वामीनाथन ने आरबीआई के पिछले सप्ताह आयोजित आंतरिक ओम्बड्समैन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं की नींव ग्राहक और संस्थान के बीच विश्वास पर टिकी होती है।

आरबीआई की वेबसाइट पर सोमवार को डाले गए इस संबोधन में स्वामीनाथन ने कहा, ‘‘ग्राहक अपनी बचत, आकांक्षाएं, वित्तीय सुरक्षा और डिजिटल जीवन तक इन संस्थानों को सौंपते हैं, इसलिए किसी भी समस्या पर निष्पक्ष और त्वरित प्रतिक्रिया बेहद जरूरी है।’’

उन्होंने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण वित्तीय स्थिरता का अभिन्न हिस्सा है, जिसके लिए आरबीआई ने ओम्बड्समैन व्यवस्था और मजबूत नियामकीय ढांचा विकसित किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि हर अनसुलझी शिकायत ग्राहक विश्वास, संस्थागत प्रतिष्ठा और नियामकीय हस्तक्षेप की दृष्टि से महंगी पड़ती है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावी आंतरिक ओम्बड्समैन व्यवस्था संबंधित संस्थान के निदेशक मंडल और वरिष्ठ प्रबंधन के दृष्टिकोण पर निर्भर करती है। यदि ग्राहक सेवा को केवल अनुपालन माना जाएगा तो शिकायत निवारण भी औपचारिकता बन जाएगा, जबकि इसे सुशासन का हिस्सा मानने पर पूरी संस्था में ग्राहक-केंद्रित संस्कृति विकसित होती है।

डिप्टी गवर्नर ने शिकायत आंकड़ों को महत्वपूर्ण कारोबारी सूचना बताते हुए कहा कि किसी उत्पाद, क्षेत्र या प्रक्रिया में बढ़ती शिकायतें संभावित खामियों का संकेत होती हैं। उन्होंने चिंता जताई कि कई मामलों में ग्राहकों के पक्ष में सुलझाई गई शिकायतें पहले आंतरिक ओम्बड्समैन प्रक्रिया को भेजी ही नहीं गईं।

उन्होंने प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्राहकों की अपेक्षाएं तेजी से बढ़ी हैं, इसलिए संस्थानों को शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास करना चाहिए।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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