नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को वित्तीय क्षेत्र को कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर आगाह करते हुए कहा कि इस प्रौद्योगिकी के फायदों को अपनाने से पहले सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना जरूरी है।
नागेश्वरन ने उद्योग संगठन एसोचैम के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हाल के समय में कुछ एआई प्रणालियां किसी निर्देश के बगैर ही अन्य संस्थानों की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणालियों में सेंध लगाने की कोशिश करते हुए पाई गई हैं।
उन्होंने इन घटनाओं के संदर्भ में कहा, “हम अक्सर जोखिमों पर तब ध्यान देते हैं जब वे हकीकत बन जाते हैं, लेकिन वित्तीय क्षेत्र के पास इतना समय नहीं है।”
नागेश्वरन ने कहा कि बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को सबसे पहले अपनी मौजूदा प्रणालियों को सुरक्षित रखने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि ‘जो हमारे पास है, उसे खोने का खतरा न हो’ और उसके बाद ही एआई को बड़े स्तर पर अपनाना चाहिए।
उनकी यह टिप्पणी हाल के महीनों में उन्नत एआई मॉडल को लेकर बढ़ी साइबर सुरक्षा चिंताओं के बीच आई है। अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा विकसित मॉडल ‘क्लॉड मिथोस’ के डेटा तक अनधिकृत पहुंच के मामले ने वैश्विक स्तर पर वित्तीय सेवाओं के लिए खतरे की आशंका को बढ़ा दिया है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने सीमा-पार भुगतान पर कहा कि इसका विस्तार तभी संभव है जब देशों के बीच व्यापार का स्तर पर्याप्त हो, ताकि अपनी-अपनी मुद्राओं में लेनदेन आर्थिक रूप से व्यवहारिक बन सके।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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