बढ़ती लागत का दबाव, सितंबर तिमाही में दाम और बढ़ा सकती हैं एफएमसीजी कंपनियां

बढ़ती लागत का दबाव, सितंबर तिमाही में दाम और बढ़ा सकती हैं एफएमसीजी कंपनियां

बढ़ती लागत का दबाव, सितंबर तिमाही में दाम और बढ़ा सकती हैं एफएमसीजी कंपनियां
Modified Date: August 9, 2026 / 02:26 pm IST
Published Date: August 9, 2026 2:26 pm IST

नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) कच्चे माल की बढ़ती लागत, जिंसों की महंगाई और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच देश की रोजमर्रा के सामान बनाने वाली (एफएमसीजी) कंपनियां सितंबर तिमाही में चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।

हालांकि, कंपनियों का मानना है कि उपभोक्ता मांग, प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी और राजस्व वृद्धि के चलते बाजार की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनियों ने जून तिमाही में कीमतों में औसतन दो से पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी की थी। अब मौजूदा तिमाही में लाभप्रदता बनाए रखने के लिए कुछ कंपनियां पैक का वजन घटाकर या चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ाने जैसे कदम उठा रही हैं। साथ ही वे महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा मानसून और अल नीनो जैसे मौसम संबंधी जोखिमों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

बेकरी उत्पाद बनाने वाली प्रमुख कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने कहा कि चीनी और पाम तेल की ऊंची कीमतों के कारण वह पांच रुपये और 10 रुपये वाले बिस्कुट पैक का वजन घटाकर सितंबर तिमाही में कीमतों में करीब 1.5 से दो प्रतिशत की प्रभावी बढ़ोतरी करेगी।

ब्रिटानिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रक्षित हरगावे ने आय घोषणा के बाद विश्लेषकों के साथ बातचीत में कहा, ‘‘मौजूदा तिमाही में भी कीमतों से जुड़ी कुछ और कार्रवाई देखने को मिलेगी। यदि अब तक इसका प्रभाव एक प्रतिशत रहा है, तो आगे इसमें करीब 1.5 से दो प्रतिशत और जुड़ सकता है।’’

हालांकि, हरगावे ने यह भी कहा कि मांग का माहौल मजबूत है और कंपनी को बाजार की दिशा सकारात्मक दिख रही है। यदि कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रहती है तो कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 में परिचालन लाभ (ईबीआईटीडीए) मार्जिन को कम-से-कम पिछले वित्त वर्ष के स्तर पर बनाए रखने का प्रयास करेगी।

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) मौजूदा तिमाही में भी कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है। हालांकि, कंपनी फिलहाल जिंस कीमतों का रुख स्पष्ट होने तक कोई बड़ा फैसला नहीं लेना चाहती।

कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुधीर सीतापति ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण कंपनी ने अब तक बड़ी मूल्य वृद्धि से परहेज किया है।

उन्होंने कहा कि कंपनी को सितंबर तिमाही में भी जून तिमाही जैसी मूल्य वृद्धि करनी पड़ सकती है।

सीतापति ने कहा कि कई कच्चे माल की कीमतें कच्चे तेल से जुड़ी होती हैं और उनमें तीन-चार सप्ताह की देरी से बदलाव आता है। ब्रेंट कच्चे तेल का भाव फिलहाल 80-85 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहने के कारण कंपनी को नहीं लगता कि अभी बड़ी अतिरिक्त मूल्य वृद्धि की जरूरत पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि राजस्व वृद्धि उम्मीद से बेहतर रहने और कच्चे माल की लागत में कुछ नरमी आने से कंपनी पूरे वित्त वर्ष के लिए तय लक्ष्यों को हासिल करने, बल्कि कुछ क्षेत्रों में उनसे बेहतर प्रदर्शन करने को लेकर आश्वस्त है।

डाबर इंडिया ने कहा कि निकट भविष्य में कच्चे माल की ऊंची लागत बनी रह सकती है। ऐसे में कंपनी लाभप्रदता बनाए रखने के लिए चुनिंदा मूल्य वृद्धि के साथ उत्पादकता और लागत दक्षता पर विशेष ध्यान देगी।

कंपनी को मजबूत ब्रांड, नए उत्पादों की श्रृंखला और प्रभावी क्रियान्वयन के दम पर वित्त वर्ष 2026-27 में दोहरे अंक की राजस्व वृद्धि का भरोसा है।

डाबर इंडिया के वैश्विक मुख्य कार्यपालक अधिकारी मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी की वृद्धि मुख्य रूप से कीमतों और राजस्व में बढ़ोतरी से आएगी। महंगाई के कारण लागत का कुछ बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ा है। मूल्य वृद्धि और राजस्व वृद्धि, बिक्री मात्रा की वृद्धि से अधिक रहने की संभावना है, क्योंकि महंगाई के चलते बिक्री मात्रा पर दबाव बना हुआ है।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के भी सितंबर तिमाही में विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में कीमतें बढ़ाने की संभावना है।

कंपनी का अनुमान है कि अप्रैल-जून तिमाही की तुलना में सितंबर तिमाही में महंगाई दो से पांच प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

एचयूएल की मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक प्रिया नायर ने कहा कि कंपनी जून तिमाही में दो से पांच प्रतिशत कीमतें बढ़ाने के बाद मौजूदा तिमाही में भी जरूरत के अनुसार संतुलित मूल्य वृद्धि करेगी, ताकि बिक्री मात्रा आधारित वृद्धि पर असर डाले बिना बढ़ती लागत की भरपाई की जा सके।

भाषा योगेश अजय

अजय


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