थोक उपभोक्ताओं की पेट्रोल पंप से खरीदारी के कारण बढ़ी ईंधन की मांग

थोक उपभोक्ताओं की पेट्रोल पंप से खरीदारी के कारण बढ़ी ईंधन की मांग

थोक उपभोक्ताओं की पेट्रोल पंप से खरीदारी के कारण बढ़ी ईंधन की मांग
Modified Date: May 21, 2026 / 06:24 pm IST
Published Date: May 21, 2026 6:24 pm IST

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) थोक उपभोक्ताओं के खुदरा पेट्रोल पंपों की ओर रुख करने से देश के कुछ स्थानों पर ईंधन की मांग में भारी वृद्धि हुई है। इसका कारण थोक आपूर्ति केंद्रों और पेट्रोल पंप पर डीजल की कीमतों में 40 से 42 रुपये प्रति लीटर का भारी अंतर होना है। हालांकि, सरकार का कहना है कि आपूर्ति पर्याप्त और स्थिर बनी हुई है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि कुछ पेट्रोल पंप पर मांग 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसका मुख्य कारण कारण कृषि मौसम और थोक उपभोक्ताओं की खुदरा पेट्रोल पंप से खरीदारी है।

मुख्य रूप से इसी वजह से कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल पंप पर ईंधन की कमी जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘थोक बिक्री के लिए डीजल और पेट्रोल पंप पर उपलब्ध डीजल की कीमत में 40 से 42 रुपये प्रति लीटर का अंतर है।’’

पेट्रोल पंप कारों और दोपहिया वाहनों को ईंधन उपलब्ध कराते हैं, जबकि राज्य सड़क परिवहन बसों और बिजली उत्पादन के लिए डीजल का उपयोग करने वाले दूरसंचार टावर जैसे थोक खरीदारों को ईंधन थोक आपूर्ति केंद्रों से खरीदना होता है।

पेट्रोल पंप पर ईंधन लागत से कम दरों पर बेचा जा रहा है, जबकि थोक आपूर्ति आमतौर पर बाजार मूल्य पर होती है।

शर्मा ने कहा कि निजी खुदरा विक्रेताओं की तुलना में सरकारी पेट्रोल पंप पर कम कीमतों के कारण भी मांग अधिक देखी जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘पेट्रोल पंप में आमतौर पर दो से तीन दिन का स्टॉक होता है और अगर मांग में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो उन्हें अस्थायी रूप से कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है…। आखिरकार, अंतिम छोर तक ईंधन पहुंचाने में लॉजिस्टिक संबंधी समस्याएं तो होती ही हैं।”

शर्मा ने कहा कि सरकार असामान्य रूप से अधिक मांग वाले पेट्रोल पंप पर आपूर्ति की बारीकी से निगरानी कर रही है और जहां भी आवश्यक है, राज्य प्रशासन और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय कर रही है।

उन्होंने कहा, “उत्पाद आपूर्ति में कोई समस्या नहीं है…। मैं लोगों से फिर अपील करूंगी कि वे घबराकर खरीदारी न करें और अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी करनी चाहिए।’’

यह बात पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी समस्याओं के बाद ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच आई हैं।

शर्मा ने कहा, “भारत सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए हैं कि आम लोगों को असुविधा न हो।’’

उन्होंने कहा कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है, जबकि रिफाइनरियां घरेलू मांग को पूरा करने के लिए ‘अनुकूलतम क्षमता’ पर काम कर रही हैं।

शर्मा ने कहा कि भारत का मासिक डीजल उत्पादन लगभग एक करोड़ टन है, जबकि खपत लगभग 85 लाख टन है।

खाना पकाने की गैस की आपूर्ति के बारे में उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाया है।

शर्मा ने कहा, ‘‘हम आयात पर निर्भर देश हैं। हम एलपीजी की 60 प्रतिशत मांग आयात के जरिये पूरा करते हैं और इसमें से 90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से आती है, जो पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण लगभग बंद है।’’

उन्होंने कहा कि रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाया है।

शर्मा ने कहा, ‘‘रिफाइनरियां प्रतिदिन 46,000-47,000 टन एलपीजी का उत्पादन कर रही हैं।’’

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने एलपीजी भराने के लिए बुकिंग के बीच अंतर बढ़ाकर और औद्योगिक खपत की तुलना में घरेलू खाना पकाने की जरूरतों को प्राथमिकता देकर ‘मांग-पक्ष प्रबंधन’ भी किया है।

भाषा रमण अजय

अजय


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