ट्रूकॉलर विवाद: ट्राई ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत ‘नामित एजेंसी’ का दर्जा मांगा

ट्रूकॉलर विवाद: ट्राई ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत 'नामित एजेंसी' का दर्जा मांगा

ट्रूकॉलर विवाद: ट्राई ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत ‘नामित एजेंसी’ का दर्जा मांगा
Modified Date: July 13, 2026 / 09:50 pm IST
Published Date: July 13, 2026 9:50 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) दूरसंचार नियामक ट्राई ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत ‘अधिकृत एजेंसी’ का दर्जा पाने की मांग की है। यह दर्जा मिलने पर वह कॉल प्रबंधन ऐप के खिलाफ कार्रवाई कर सकेगा। फिलहाल सूचना प्रौद्योगकी मंत्रालय इस मामले पर गौर कर रहा है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने शुक्रवार को कहा था कि कोई भी ऐप 1600 नंबर श्रृंखला से आने वाली फोन कॉल को ब्लॉक नहीं कर सकता। इस नंबर श्रृंखला का उपयोग विनियमित संस्थाओं और सरकार द्वारा नागरिकों से बातचीत के लिए किया जाता है।

ट्राई का यह बयान कॉलर पहचान ऐप ‘ट्रूकॉलर’ के साथ चल रही खींचतान के बीच आया है। यह विवाद खास नंबर श्रृंखला से आने वाली कॉल की ‘लेबलिंग’ और पहचान को लेकर है।

सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि नियामकीय अधिकार क्षेत्र का मुद्दा तकनीकी है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) जैसी कुछ एजेंसियों को कार्रवाई करने के लिए अधिकृत करने के नियम हैं। यह काम संबंधित सरकार करती है। इसलिए सवाल यह है कि ट्राई को अधिकृत करने के लिए संबंधित सरकार कौन सी है…। दूरसंचसार विभाग का मानना ​​है कि यह सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय है, जबकि मंत्रालय का कहना है कि वह इस पर विचार करेगा और फैसला लेगा।’’

उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय सीधे तौर पर ट्रूकॉलर वाले मुद्दे पर विचार नहीं कर रहा है।

भाषा रमण अजय

अजय


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