मुंबई, 31 अगस्त (भाषा) देश को विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऐसे बुनियादी ढांचे की जरूरत है जो भविष्य की जरूरतों के अनुरूप, जलवायु-अनुकूल, प्रौद्योगिकी-सक्षम, वित्तीय रूप से टिकाऊ और समावेशी हो। रेटिंग एजेंसी केयरएज ने सोमवार को यह बात कही।
‘बुनियादी ढांचा परिदृश्य-विकसित भारत के लिए दृष्टिकोण’ शीर्षक से अपनी रिपोर्ट में एजेंसी ने यह भी कहा कि भारत को ऐसे शहरों की जरूरत है जो उत्पादक होने के साथ रहने योग्य हों। इसके अलावा स्वच्छ और कुशल परिवहन व्यवस्था, सुरक्षित एवं हरित ऊर्जा नेटवर्क, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक श्रृंखला और ऐसी डिजिटल प्रणालियां जरूरी हैं, जो शासन व्यवस्था को सुगम बनाएं।
अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोमवार को मुंबई में आयोजित केयरएज के सम्मेलन में रिपार्ट जारी की।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत का बुनियादी ढांचा विकास एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है। विकास का अगला चरण केवल क्षमता निर्माण से आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे के एकीकरण, मजबूती, दक्षता और परिसंपत्तियों के प्रभावी उपयोग पर केंद्रित हो रहा है।
अदाणी ने कहा, ‘‘मैं केयरएज टीम के सामने एक चुनौती रखना चाहता हूं। बुनियादी ढांचे के लिए एकीकृत मंच आधारित दुनिया की पहली व्यापक ऋण मूल्यांकन रूपरेखा भारत से क्यों नहीं आनी चाहिए? केयरएज को इसका नेतृत्व क्यों नहीं करना चाहिए? ऐसी रूपरेखा विकसित की जानी चाहिए जो बहुआयामी बुनियादी ढांचे का आकलन करने में सक्षम हो, जो विभिन्न परिवेश के व्यापक प्रभाव और संबंधित क्षेत्रों से मिलने वाले अतिरिक्त मूल्य को पहचान सके।’’
उन्होंने कहा, ‘‘संभवत: एक दिन दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाएं भारत में विकसित इस तरह के ढांचे को अपने मानक के रूप में इस्तेमाल करें।’’
रिपोर्ट में बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा, सौर विनिर्माण, स्मार्ट मीटर, पारेषण, परमाणु ऊर्जा, डेटा सेंटर, सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे और बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) समेत विभिन्न क्षेत्रों का आकलन किया गया है। इसमें उन अवसरों और प्रमुख पहलुओं को रेखांकित किया गया है, जो विकसित भारत 2047 की दिशा में देश के बुनियादी ढांचे की प्रगति को प्रभावित करेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, जोर अब अलग-अलग परियोजनाओं से हटकर एकीकृत बुनियादी ढांचा परिवेश पर हो गया है। इसमें बहु-माध्यम संपर्क, लॉजिस्टिक दक्षता, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण अनुकूल उपाय और नागरिक सुविधाओं की योजना एक साथ बनाई जाती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि केंद्र का प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान करीब 38 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, केंद्रीय बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय के लिए 12.20 लाख करोड़ रुपये, यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.1 प्रतिशत, आवंटित किया गया है।
केयरएज के प्रबंध निदेशक एवं समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी मेहुल पांड्या ने कहा, ‘‘सार्वजनिक निवेश का यह स्तर बुनियादी ढांचा परिवेश के निर्माण के प्रति सरकार के संकल्प को बताता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार के लगातार पूंजीगत व्यय से विभिन्न क्षेत्रों, सेवाओं, रोजगार और क्षेत्रीय विकास में व्यापक गुणक प्रभाव पैदा हुआ है। साथ ही इससे परियोजनाओं की स्पष्टता बढ़ाकर, क्रियान्वयन जोखिम घटाकर और परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण के अवसर बढ़ाकर निजी निवेश आकर्षित करने की भारत की क्षमता भी मजबूत हुई है।’’
भाषा रमण अजय
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