जी20 घोषणा से एमएसएमई क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद: विशेषज्ञ

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जी20 घोषणा से एमएसएमई क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद: विशेषज्ञ

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  • Publish Date - September 24, 2023 / 04:30 PM IST,
    Updated On - September 24, 2023 / 04:30 PM IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) भारत की अध्यक्षता में जी20 देशों की घोषणा से उम्मीद है कि नियामकीय प्रक्रिया को सरल बनाकर सूक्ष्म, लघु एव मझोले उपक्रम (एमएसएमई) क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन देने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों ने यह राय देते हुए कहा कि इससे छोटे और मझोले उद्योगों को सस्ती पूंजी तक पहुंच मिलेगी।

उन्होंने कहा कि एमएसएमई के संबंध में जी20 की नयी दिल्ली घोषणा में की गई प्रतिबद्धताओं का सदस्य देशों को पालन करना चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र में रोजगार पैदा करने और सतत वृद्धि को बढ़ावा देने की क्षमता है।

इस महीने की शुरुआत में अपनाई गई नयी दिल्ली घोषणा में कहा गया है कि जी20 मानता है कि स्टार्टअप और एमएसएमई वृद्धि के स्वाभाविक इंजन हैं। वे नवाचार को बढ़ावा देकर और रोजगार पैदा करके सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की कुंजी बन सकते हैं।

घोषणा में कहा गया है, ‘‘हम भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान स्टार्टअप 20 अंगेजमेंट ग्रुप की स्थापना और इसके जारी रहने का स्वागत करते हैं।’’

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) दिल्ली राज्य परिषद के चेयरमैन और सैमटेल एवियोनिक्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक तथा सीईओ पुनीत कौरा ने कहा कि एमएसएमई को दुनियाभर में महत्वपूर्ण माना जाता है। जी20 घोषणा ने एक बार फिर इस क्षेत्र के लिए सरकारों की वित्तीय और गैर-वित्तीय सहायता की जरूरत को रेखांकित किया है।

उन्होंने आगे कहा, ‘‘ये वादे कागज पर नहीं रहने चाहिए, बल्कि जमीन पर कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करने की अपार संभावनाएं हैं।”

द डिस्पोजल कंपनी (टीडीसी) की सीईओ भाग्यश्री भंसाली ने कहा कि स्टार्टअप और एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए सरकार को नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना चाहिए, किफायती पूंजी तक पहुंच बढ़ानी चाहिए, नवाचार के लिए उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए और लक्षित कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करने चाहिए।

आयोटेक वर्ल्ड एविगेशन के सह-संस्थापक दीपक भारद्वाज ने कहा कि प्रत्येक एमएसएमई के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर सही मात्रा में वित्त पाने की है। प्रत्येक बैंक अलग-अलग नीतियां अपनाते हैं, जिससे वित्त प्राप्त करने में बाधा पैदा होती है।

उन्होंने कहा कि वित्तपोषण के लिए स्पष्ट मानदंड बनाने चाहिए, ताकि प्रत्येक बैंक एक समान मानदंड अपना सके और साथ ही पात्र एमएसएमई को सही मात्रा में वित्त मिल सके।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय