होर्मुज व्यवधान के बीच तेल कंपनियों का मुनाफा सामान्य, संकट से प्रेरित अप्रत्याशित लाभ नहीं

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होर्मुज व्यवधान के बीच तेल कंपनियों का मुनाफा सामान्य, संकट से प्रेरित अप्रत्याशित लाभ नहीं

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  • Publish Date - May 28, 2026 / 11:22 AM IST,
    Updated On - May 28, 2026 / 11:22 AM IST

नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 77,821 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। हालांकि यह आय, संकट से प्रेरित अप्रत्याशित लाभ की बजाय सामान्य लाभप्रदता की वापसी को दर्शाती है। सरकारी और उद्योग से जुड़े आंकड़ों में यह जानकारी मिली।

पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड का कुल शुद्ध लाभ 77,821 करोड़ रुपये रहा। यह लगभग 20 लाख करोड़ रुपये के संयुक्त कारोबार पर करीब तीन से चार प्रतिशत का शुद्ध मुनाफा दर्शाता है, जो वैश्विक वस्तु शोधन मानकों के अनुरूप है।

विपक्षी दलों की आलोचना मुख्य रूप से वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में मुनाफे में 130 प्रतिशत की वृद्धि को लेकर रही है। हालांकि, वित्त वर्ष 2024-25 में लाभ घटकर 33,602 करोड़ रुपये रह गया था क्योंकि ओएमसी ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 40,434 करोड़ रुपये का घाटा अपने ऊपर लिया था। इससे तुलना का आधार कृत्रिम रूप से कम हो गया था।

इस एकमुश्त बोझ को समायोजित करने पर वित्त वर्ष 2025-26 की लाभप्रदता वित्त वर्ष 2023-24 के 80,986 करोड़ रुपये के संयुक्त लाभ के करीब बैठती है।

उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि आय के स्तर को संचालन के पैमाने के संदर्भ में देखना चाहिए। भारत की तीनों ओएमसी मिलकर सालाना लगभग 20 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करती हैं जबकि केवल इंडियन ऑयल का कारोबार करीब 10 लाख करोड़ रुपये के आसपास है।

विश्लेषकों के अनुसार, बड़े शोधन उद्योग में एक से तीन प्रतिशत का परिचालन मुनाफा सामान्य माना जाता है और यह पूंजीगत व्यय, रिफाइनरी उन्नयन और कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जरूरी होता है।

एक रिफाइनरी विस्तार कार्यक्रम की लागत 50,000 करोड़ से 60,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। क्षेत्र 2030 तक शोधन क्षमता को 31 करोड़ टन प्रति वर्ष से अधिक तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

कंपनियों का यह भी कहना है कि वित्त वर्ष 2025-26 की कमाई पर होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान का असर सीमित रहा, क्योंकि रिफाइनरियां पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से पहले खरीदे गए कच्चे तेल के 50-60 दिन के भंडार का प्रसंस्करण कर रही थीं।

इस कारण कच्चे तेल की खरीद लागत, माल ढुलाई शुल्क और बीमा प्रीमियम में वृद्धि का असर मुख्य रूप से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के परिणामों में दिखेगा जो अगस्त में जारी होने वाले हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है और इसमें व्यवधान से एशिया में तेल कीमतों एवं लागत में तेज वृद्धि हुई है।

सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में हालिया बढ़ोतरी (लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर और सीएनजी में छह रुपये प्रति किलोग्राम वृद्धि) का बचाव करते हुए कहा है कि आपूर्ति झटके के बावजूद भारत में कीमतों में बढ़ोतरी पड़ोसी देशों की तुलना में सीमित रही है।

आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, संकट शुरू होने के बाद से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग आठ से नौ प्रतिशत बढ़ी हैं जबकि कई पड़ोसी देशों में यह वृद्धि 20 से 67 प्रतिशत के बीच रही है।

नयी दिल्ली ने 27 मार्च 2026 से पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की जो 2021 और 2022 में की गई कटौतियों के अतिरिक्त है।

अधिकारियों के अनुसार, 2021 से अब तक पेट्रोल पर कुल 23 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 26 रुपये प्रति लीटर की उत्पाद शुल्क राहत दी जा चुकी है।

सरकार का यह भी कहना है कि ओएमसी के मुनाफे का लगभग आधा हिस्सा लाभांश और करों के रूप में वापस सरकारी खजाने में आता है जिससे राजमार्ग, रेल और मेट्रो परियोजनाओं जैसे बुनियादी ढांचा खर्च को वित्तपोषित किया जाता है। वहीं शेष आय ऊर्जा सुरक्षा और शोधन क्षमता विस्तार में निवेश के लिए उपयोग होती है।

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता की आशंकाओं के बीच ओएमसी की लाभप्रदता पर बहस तेज हो गई है।

भाषा निहारिका

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