बजट योजना से पहले उद्योग जगत से सीधे संवाद के लिए वित्त मंत्रालय का अभियान

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बजट योजना से पहले उद्योग जगत से सीधे संवाद के लिए वित्त मंत्रालय का अभियान

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  • Publish Date - May 28, 2026 / 10:44 AM IST,
    Updated On - May 28, 2026 / 10:44 AM IST

(अम्मार जैदी)

नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने विनिर्माण इकाइयों और औद्योगिक समूहों के दौरों का एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम शुरू किया है। सरकार आर्थिक नीति निर्माण का समर्थन करने और मौजूदा पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियों का प्रबंधन करने के लिए जमीनी स्तर पर उद्योग की प्रतिक्रिया हासिल करना चाहती है।

यह पहल वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) के नेतृत्व में की जा रही है। इसके तहत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सूक्ष्म, लघु एवं मझोली विनिर्माण इकाइयों के साथ-साथ बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं का दौरा करेंगे, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में परिचालन एवं नीतिगत चुनौतियों का आकलन किया जा सके।

‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा देखी गई आधिकारिक सूचना के अनुसार, इन दौरों का उद्देश्य बुनियादी ढांचे की बाधाओं, नियामकीय अड़चनों, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, वित्त तक पहुंच, कौशल की कमी और प्रौद्योगिकी अपनाने से जुड़ी समस्याओं पर प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त करना है।

वित्त मंत्रालय से टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का तत्काल कोई जवाब नहीं मिला है।

सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में मजबूती और कुछ क्षेत्रों में लचीलापन होने के बावजूद, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सख्त वित्तीय परिस्थितियों के बीच भारत में निजी निवेश गतिविधियां असमान बनी हुई हैं।

पश्चिम एशिया में जारी संकट ने उद्योग जगत की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, रुपये में कमजोरी और चालू खाते के घाटे में विस्तार हुआ है। साथ ही, आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हुई हैं और आयात तथा वैश्विक व्यापार पर निर्भर व्यवसायों के लिए माल ढुलाई एवं कच्चे माल की लागत बढ़ी है।

इन समस्याओं की गहराई को बेहतर समझने के लिए डीईए व्यापक स्तर के विश्लेषण के साथ-साथ जमीनी स्तर की जानकारी भी जुटाना चाहता है। इसके तहत अधिकतम पांच सदस्यों के दल का नेतृत्व अतिरिक्त सचिव, संयुक्त सचिव या निदेशक स्तर के अधिकारी करेंगे। दल विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में दो से तीन दिन का दौरा करेंगे।

कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दलों को विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, रोजगार एवं अनुसंधान क्षेत्रों को दौरा करना होगा और इस दौरान कम से कम दो स्टार्टअप से बातचीत करनी होगी।

डीईए ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य वास्तविक समय में प्राप्त जमीनी सुझावों को आर्थिक नीतियों और आगामी केंद्रीय बजट प्रस्तावों में शामिल कर साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण को मजबूत करना है।

विभाग द्वारा 17 अप्रैल 2026 को जारी एक कार्यालय आदेश में कहा गया कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में ‘‘ संरचित, क्षेत्र-आधारित मूल्यांकन अभ्यास ’’ की आवश्यकता है ताकि प्रत्यक्ष जानकारी के आधार पर अधिक लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप किए जा सकें।

दौरों से संबंधित विस्तृत क्षेत्रवार रिपोर्ट पूरा होने के 10 दिन के भीतर आर्थिक कार्य सचिव को सौंपी जाएंगी ताकि नीतिनिर्माण एवं क्रियान्वयन की समीक्षा में सहायता मिल सके।

उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) से कंपनियों और अधिकारियों के बीच बातचीत को सुगम बनाने को कहा गया है, जबकि कंपनियों को अपनी नीतिगत सिफारिशें एवं परिचालन संबंधी चिंताएं दलों के साथ साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

ये दौरे उद्योग के साथ सीधे संवाद को बढ़ावा देने और बुनियादी ढांचे की सीमाएं, नियामकीय चुनौतियां, वित्त तक पहुंच, कौशल आवश्यकताएं तथा प्रौद्योगिकी अपनाने जैसे परिचालन पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए किए जा रहे हैं।

डीईए के आदेश के अनुसार, यह पहल संरचित, क्षेत्र-आधारित आकलन के माध्यम से साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण को और मजबूत करेगी।

इसका उद्देश्य नीतिगत खामियों को दूर करना और नीति निर्माण तथा क्रियान्वयन को बेहतर बनाना है। साथ ही, यह नीति की सटीकता बढ़ाने, डीईए के सभी प्रभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और अधिक समन्वित तथा समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का प्रयास है।

इस कदम का उद्देश्य बुनियादी ढांचे की अड़चनें, नियामक बाधाएं, आपूर्ति श्रृंखला की रुकावटें, वित्त तक पहुंच, कौशल की कमी, प्रौद्योगिकी अपनाने के मुद्दे सहित क्षेत्र-विशिष्ट परिचालन चुनौतियों को व्यवस्थित रूप से समझना भी है, जिससे जमीनी स्तर पर मौजूदा नीतियों और योजनाओं की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके। इनमें उनके कार्यान्वयन की चुनौतियां भी शामिल हैं।

डीईए ने कहा कि यह पहल जमीनी हकीकतों और नीति निर्माण के बीच एक समन्वय स्थापित करेगी जिससे यह सुनिश्चित होगा कि नीतिगत हस्तक्षेप प्रतिक्रियाशील और लक्षित हों।

नीति निर्माण और आगामी केंद्रीय बजट प्रस्तावों के समर्थन हेतु निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत क्षेत्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है।

भाषा निहारिका रंजन

रंजन