गडकरी ने नई प्रौद्योगिकियों का लाभ लेने के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम की वकालत की

गडकरी ने नई प्रौद्योगिकियों का लाभ लेने के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम की वकालत की

गडकरी ने नई प्रौद्योगिकियों का लाभ लेने के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम की वकालत की
Modified Date: May 21, 2026 / 01:56 pm IST
Published Date: May 21, 2026 1:56 pm IST

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को भारतीय कंपनियों से नई प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम बनाने की वकालत की।

एएमसीएचएएम के वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सड़क परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआरे) तैयार करने में अमेरिकी परामर्श कंपनियों की मदद लेने की संभावनाएं तलाश रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘ भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है… अमेरिकी कंपनियां कई नई प्रौद्योगिकी विकसित करती हैं, इसलिए भारतीय कंपनियों के लिए उनके साथ संयुक्त उपक्रम करना बेहद महत्वपूर्ण है।’’

लॉजिस्टिक्स में आपूर्ति श्रृंखलाओं को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए गडकरी ने कहा कि एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के तेज विस्तार से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटकर एकल अंक में आ गई है।

उन्होंने कहा कि छह महीने पहले आईआईटी चेन्नई, आईआईटी कानपुर और आईआईएम बेंगलुरु की रिपोर्ट में बताया गया कि एक्सप्रेसवे तथा आर्थिक गलियारों के निर्माण से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत हो गई है।

मंत्री ने कहा, ‘‘ अब भारत की लॉजिस्टिक्स लागत एकल अंक में आ गई है।’’

उन्होंने बताया कि अमेरिका और यूरोप में लॉजिस्टिक्स लागत 12 प्रतिशत है जबकि चीन में यह 8-10 प्रतिशत के बीच है।

भारत के मोटर वाहन क्षेत्र पर मंत्री ने कहा, ‘‘ अगले पांच वर्ष में हमारा लक्ष्य भारत के मोटर वाहन उद्योग को दुनिया में पहले स्थान पर लाना है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ जब मैंने परिवहन मंत्री का कार्यभार संभाला था, तब भारतीय मोटर वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है।’’

गडकरी ने बताया कि मोटर वाहन क्षेत्र चार लाख युवाओं को रोजगार देता है। यह केंद्र व राज्यों को सबसे अधिक माल एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रदान करता है। वर्तमान में अमेरिका का मोटर वाहन उद्योग 78 लाख करोड़ रुपये का है। इसके बाद चीन (47 लाख करोड़ रुपये) और भारत (22 लाख करोड़ रुपये) का स्थान है।

मंत्री ने कहा कि जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता आर्थिक बोझ है क्योंकि हर साल 22 लाख करोड़ रुपये ईंधन आयात पर खर्च होते हैं और यह पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है। इसलिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि वाहन प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में 10 राजमार्ग खंडों की पहचान की है जहां हरित हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक चलाए जाएंगे।

इन राजमार्गों में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-पुरी-कोणार्क, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, जमशेदपुर-कलिंगानगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि और जामनगर-अहमदाबाद सहित अन्य शामिल हैं।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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